ज़रा हटके
01-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। गलत खानपान और तनावपूर्ण दिनचर्या के चलते पेट की समस्याएं, गैस, कब्ज, बेचैनी, घबराहट, जोड़ों में दर्द या नींद न आना जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में ऊर्जा का प्रवाह रुकता है, तब ही बीमारी जन्म लेती है। इसे संतुलित करने का एक प्रभावी और आसान तरीका है हस्त मुद्रा। हस्त मुद्राओं के जरिए उंगलियों का संबंध सीधे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर पंचभूतों आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी से बना है। इन तत्वों में असंतुलन होने पर स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। विशेष रूप से वायु तत्व अत्यधिक अस्थिर माना जाता है। अगर यह बिगड़ जाए तो गैस, अपच, कब्ज, बेचैनी, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसी वायु तत्व को संतुलित करने के लिए योग में वायु मुद्रा का अभ्यास सुझाया गया है। यह मुद्रा दिखने में सरल है, लेकिन इसके असर शरीर और मन पर गहरे होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतीक है और तर्जनी उंगली वायु तत्व का। जब तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के नीचे दबाया जाता है, तो अग्नि तत्व वायु पर नियंत्रण पाता है। वायु मुद्रा करने के लिए किसी शांत स्थान पर बैठें, रीढ़ को सीधा रखें और आंखें बंद कर लें। तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के मूल में दबाएं और बाकी तीन उंगलियां सीधी रखें। सामान्य सांस लें और इस मुद्रा में 15 से 20 मिनट तक रहें। सुबह खाली पेट अभ्यास करना अधिक प्रभावी माना जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे कुर्सी पर बैठकर या चलते-फिरते भी किया जा सकता है। इस मुद्रा का पहला असर तंत्रिका तंत्र पर दिखाई देता है। यह नर्व्स को शांत करती है, जिससे बेचैनी, घबराहट और तनाव धीरे-धीरे कम होते हैं। दिमाग शांत होने से शरीर के अंग भी बेहतर ढंग से काम करने लगते हैं। पेट में फंसी वायु बाहर निकलने से गैस, सूजन और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। इसके अलावा रक्त संचार भी बेहतर होता है, जो मांसपेशियों और जोड़ों तक पोषण पहुंचाता है। सुदामा/ईएमएस 01 फरवरी 2026