ज़रा हटके
02-Feb-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। डिलीवरी के बार पीरियड्स का देर से आना ज्यादातर मामलों में पूरी तरह सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है। डॉक्टरों के अनुसार, डिलीवरी के बाद 6 हफ्तों से लेकर 12 महीनों तक पीरियड्स न आना सामान्य माना जाता है। खासतौर पर वे महिलाएं जो अपने बच्चे को पूरी तरह से स्तनपान कराती हैं, उनमें पीरियड्स आने में और अधिक समय लग सकता है। कुछ मामलों में यह अवधि 18 महीने तक भी देखी गई है। हालिया सर्वे के मुताबिक, भारत में करीब आधी से ज्यादा महिलाओं को डिलीवरी के 6 महीने के भीतर पहला पीरियड आ जाता है, जबकि बाकी महिलाओं में यह समय इससे अधिक हो सकता है। पीरियड्स जल्दी या देर से आना आमतौर पर किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, जब तक कि इसके साथ अन्य परेशान करने वाले लक्षण न हों। विशेषज्ञ बताते हैं कि डिलीवरी के बाद पीरियड्स की वापसी कई कारकों पर निर्भर करती है। स्तनपान इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है। दूध बनने वाला हार्मोन प्रोलैक्टिन ओव्यूलेशन को दबा देता है, जिससे पीरियड्स देर से आते हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव, नींद की कमी और शारीरिक थकान भी हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करती है। डिलीवरी के बाद शरीर को दोबारा सामान्य स्थिति में आने में समय लगता है, और इसी रिकवरी प्रक्रिया के दौरान पीरियड्स की टाइमिंग बदल सकती है। हार्मोनल उतार-चढ़ाव भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया शरीर को अगली प्रेग्नेंसी के लिए तैयार करने का एक प्राकृतिक तरीका है। डिलीवरी के बाद पीरियड्स को सामान्य करने के लिए जीवनशैली और खानपान पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार जिसमें आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन भरपूर मात्रा में हों, शरीर की रिकवरी में मदद करता है। हरी सब्जियां, दालें, फल, नट्स और पर्याप्त पानी पीना जरूरी माना जाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे अलसी और अखरोट सूजन कम करने और हार्मोन बैलेंस में सहायक होते हैं। इसके साथ ही हल्की एक्सरसाइज, जैसे रोजाना टहलना, पोस्टनेटल योग और स्ट्रेचिंग, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है और मूड भी सुधारती है। तनाव कम रखना और पर्याप्त आराम लेना भी इस दौरान बेहद अहम है। हालांकि, कुछ स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। यदि डिलीवरी के बाद बहुत लंबे समय तक पीरियड्स न आएं या पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द, अत्यधिक ब्लीडिंग, चक्कर या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सुदामा/ईएमएस 02 फरवरी 2026