राष्ट्रीय
01-Feb-2026


अब और बढ़ेगी भारतीय सेना की ताकत नई दिल्ली(ईएमएस)। केंद्र सरकार ने साल 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया है। रक्षा बलों को कैपिटल आउटले बजट के तहत मॉडर्नाइजेशन के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे। पिछले साल बजट 2025-26 में रक्षा सेवाओं के लिए 1.80 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो कि बाद में संशोधन के बाद 1.86 लाख करोड़ रुपये हो गया। रक्षा मंत्रालय के बजट आवंटन में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। वित्त वर्ष 26-27 में, कैपिटल आउटले में 21.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो वित्त वर्ष 25-25 में 1.80 लाख करोड़ रुपये से बढक़र 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा सेवाओं (राजस्व) के लिए 3,65,478.98 करोड़ रुपये मिले हैं, जो कि पिछले साल के बजट की तुलना में 17.24 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है। कैपिटल आउटले के लिए 2,19,306.47 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इसमें पिछले साल के बजट की तुलना में 21.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रक्षा पेंशन के लिए भी आवंटन में बढ़ोतरी हुई है, केंद्र सरकार ने 1,71,338.22 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए मुख्य बात यह रही कि सरकार ने इस सेक्टर के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट दी है। रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की, रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत या समग्र आवश्यकताओं में उपयोग किए जाने वाले विमानों के पुर्जों के निर्माण के लिए आयातित कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव है। रक्षा यूनिट के लिए उठाए गए इस कदम से रक्षा विमानन रखरखाव की लागत कम होगी और सैन्य एयरोस्पेस क्षमताओं में अधिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा। वीबी-जीराम जी को 95,692.31 करोड़ सबसे बड़ा आवंटन रोजगार गारंटी से जुड़ी वीबी-जीराम जी को मिला। इसके लिए 95,692.31 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पिछले साल मूल बजट 86,000 करोड़ था, जिसे संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 88,000 करोड़ किया गया था। इसके अलावा इस साल मनरेगा के प्रोग्राम कंपोनेंट के लिए अलग से 30,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसका सीधा फायदा ग्रामीण मजदूरों, बेरोजगार परिवारों और गांवों में छोटे इंफ्रास्ट्रक्चर कामों को मिलेगा। पीएम किसान योजना को 63500 करोड़ किसानों के लिए चल रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का बजट 63,500 करोड़ रुपए रखा गया है, जो पिछले साल के बराबर है। इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को सीधे खाते में किस्त मिलती है, जिससे बीज, खाद और खेती के खर्च में मदद होती है। आयुष्मान भारत योजना को 9,500 करोड़ स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए 9,500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। पिछले साल यह 9,401 करोड़ था, जो रिवाइज्ड अनुमान में घटकर 8,995 करोड़ रह गया था। इस स्कीम से गरीब और कमजोर परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है, खासकर बड़े अस्पतालों में महंगे इलाज के दौरान। पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को 2,27,429 करोड़ खाद्य सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना पर 2,27,429 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पिछले साल 2,03,000 करोड़ का बजट था, जो संशोधित अनुमान में बढक़र 2,27,753.65 करोड़ हो गया था। इस योजना से करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त या सस्ता राशन मिलता है। राजकोषीय घाटे पर सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’ बजट भाषण में वित्त मंत्री ने सबसे बड़ी राहत की खबर देश की आर्थिक सेहत को लेकर दी है। सरकार ने साल 2021-22 में जो वादा किया था कि वह राजकोषीय घाटे को काबू में लाएगी, उसे बखूबी निभाया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह आंकड़ा मौजूदा वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत के अनुमान से भी कम है। राजकोषीय घाटा वह अंतर है जो सरकार की कमाई और खर्च के बीच होता है। इसे कम करने का सीधा मतलब है कि सरकार अपनी आमदनी के दायरे में रहकर खर्च करने की कोशिश कर रही है, जिससे भविष्य में महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव कम हो सकता है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी उधारी पर लगाम लगाएगी ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर कर्ज का बोझ न बढ़े। सरकार पर कर्ज कितना है इस बजट में सरकार ने डेट-टू-जीडीपी रेश्यो को घटाने का प्रस्ताव दिया है। वित्त वर्ष 2027 के लिए इसे 55.6 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है, जो मौजूदा वित्त वर्ष में 56.1 प्रतिशत था। इसका मतलब है कि सरकार अपनी कुल अर्थव्यवस्था के मुकाबले कर्ज के अनुपात को कम कर रही है। अपने खर्चों और घाटे की भरपाई के लिए सरकार वित्त वर्ष 2027 में डेटेड सिक्योरिटीज के जरिए बाजार से 11.7 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी। हालांकि, वित्त मंत्री ने अपने भाषण में यह भरोसा दिलाया है कि आने वाले सालों में राजकोषीय नीति को इस तरह से बनाया जाएगा कि केंद्र सरकार का कर्ज लगातार घटता रहे। चीन की बादशाहत को चुनौती इस बजट में ‘मेक इन इंडिया’ को नई धार देने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन का दबदबा है और ग्लोबल मार्केट में उसकी हिस्सेदारी करीब 95 प्रतिशत है। इस एकाधिकार को तोडऩे के लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की विशेष मदद का प्रावधान किया है। यह एक लेबर-इंटेंसिव इंडस्ट्री है, यानी इससे देश में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे और जरूरी कंटेनरों के लिए चीन पर हमारी निर्भरता कम होगी। वहीं, संघीय ढांचे को मजबूत करते हुए वित्त मंत्री ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिश को मानते हुए राज्यों को टैक्स में 41 प्रतिशत की हिस्सेदारी देने का फैसला बरकरार रखा है। अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में केंद्र सरकार राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये टैक्स डिवोल्यूशन के रूप में जारी करेगी। आर्थिक विकास के लिए छह प्रमुख प्राथमिकताएं बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की पहली जिम्मेदारी आर्थिक वृद्धि को तेज करना और उसे लंबे समय तक बनाए रखना है। इसके तहत छह अहम क्षेत्रों में ठोस हस्तक्षेप किए जाएंगे। ये क्षेत्र हैं—रणनीतिक और उभरते सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार, पुराने और पारंपरिक उद्योगों का पुनर्जीवन, मजबूत और प्रतिस्पर्धी एमएसएमई का निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति देना, दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना, और शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन का निर्माण। रणनीतिक सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा सरकार की विकास रणनीति में मैन्युफैक्चरिंग को केंद्र में रखा गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, केमिकल्स और कैपिटल गुड्स जैसे रणनीतिक और उभरते सेक्टरों में उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाएगी। इससे न केवल घरेलू मांग पूरी होगी, बल्कि भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी उभर सकेगा। सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। बायोफार्मा शक्ति से स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती स्वास्थ्य क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा देने के लिए वित्त मंत्री ने ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना की घोषणा की। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसका उद्देश्य बायोलॉजिक दवाओं और बायोसिमिलर के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है। वित्त मंत्री ने कहा कि देश में डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों जैसी गैर-संचारी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इनके इलाज में आधुनिक बायोलॉजिक दवाओं की अहम भूमिका है। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर खास फोकस बजट 2026 में सेमीकंडक्टर सेक्टर को भी बड़ी प्राथमिकता दी गई है। सरकार मौजूदा सेमीकंडक्टर मिशन को आगे बढ़ाते हुए उपकरण निर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत करेगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत निवेश और उत्पादन को और बढ़ावा दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने बताया कि इस योजना को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इससे तकनीकी क्षमता और कौशल विकास को मजबूती मिलेगी। केमिकल्स और कैपिटल गुड्स में आत्मनिर्भरता की कोशिश आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केमिकल सेक्टर में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। ये पार्क क्लस्टर आधारित मॉडल पर विकसित किए जाएंगे, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसके अलावा कैपिटल गुड्स सेक्टर में हाई-टेक और हाई-प्रिसीजन कंपोनेंट्स के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि घरेलू उद्योगों की जरूरतें देश में ही पूरी हो सकें। एमएसएमई और पारंपरिक उद्योगों का पुनर्जीवन वित्त मंत्री ने कहा कि छोटे और मझोले उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बजट में एमएसएमई को ‘चैंपियन’ बनाने के लिए वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही पारंपरिक और पुराने उद्योगों को नई तकनीक और निवेश के जरिए फिर से मजबूत किया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी नई रफ्तार इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को आर्थिक विकास का बड़ा आधार मानते हुए सरकार ने इस क्षेत्र में मजबूत प्रोत्साहन देने की बात कही है। सडक़, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाकर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति दी जाएगी। शहरी विकास और दीर्घकालिक स्थिरता पर जोर बजट में शहरी विकास को भी अहम स्थान दिया गया है। सरकार सिटी इकोनॉमिक रीजन विकसित करेगी, जिससे शहरों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों का भी संतुलित विकास हो सके। साथ ही, दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत सुधारों पर भी ध्यान दिया जाएगा। बजट में दिखा चुनावी तडक़ा! बजट 2025 में बिहार पर विशेष ध्यान दिया गया था क्योंकि राज्य में 2025 में चुनाव होने थे। इसी तरह, 2021 के बजट में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी पर केंद्रित घोषणाएं शामिल थीं। इस बार भी, बजट में इन चुनावी राज्यों पर फोकस किया गया है। जहां इस साल अप्रैल में मतदान होना है। कपड़ा क्षेत्र, सडक़, रेल इंफ्रा और रेयर अर्थ मेटल्स की माइनिंग से संबंधित घोषणाएं की गई है। वहीं दूसरी ओर वित्त मंत्री सीतारमण के भाषण में इन राज्यों को टारगेट करते हुए टूरिज्म और तीर्थयात्रा प्रोग्राम्स से संबंधित भी कई तरह के ऐलान हुए हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर चुनावी राज्यों को बजट से क्या क्या मिला है? पश्चिम बंगाल पर्यावरण के अनुकूल माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में डंकुनी से पश्चिम में सूरत तक एक नया डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा। पूर्वोदय राज्यों में पांच पर्यटन स्थलों का निर्माण किया जाएगा और 4,000 ई-बसों की व्यवस्था की जाएगी। दुर्गापुर में एक सुव्यवस्थित केंद्र के साथ एक इंटीग्रेटिड ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रीयल कोरिडॉर विकसित किया जाएगा। तमिलनाडु मिनरल-समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को महत्वपूर्ण मिनरल फैसिलिटीज की स्थापना में सहायता प्रदान की जाएगी। शहरों के बीच विकास को जोडऩे वाले सात हाई-स्पीड रेल कोरिडॉर विकसित किए जाएंगे, जिसमें मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी शामिल हैं। पुलिकट झील पर और तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की सीमावर्ती क्षेत्रों में पक्षी अवलोकन के लिए मार्ग विकसित किए जाएंगे। उन्होंने तमिलनाडु के मंदिर नगर सहित दूसरे और तीसरे टियर के शहरों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपए के खर्च की घोषणा की। केरल और असम वित्त मंत्री ने खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को महत्वपूर्ण खनिज सुविधाओं की स्थापना में सहायता देने का प्रस्ताव रखा है। कछुओं के प्रमुख घोंसला बनाने वाले स्थलों के साथ-साथ उनके लिए मार्ग भी विकसित किए जाएंगे। अगले पांच वर्षों में दूसरे और तीसरे टियर के शहरों, जिनमें मंदिर नगर असम भी शामिल है, में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 20,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान मुंबई-पुणे - महाराष्ट्र के इन दो बड़े शहरों के बीच सफर अब बहुत तेज होगा पुणे-हैदराबाद - महाराष्ट्र और तेलंगाना को जोड़ेगा हैदराबाद-चेन्नई - दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण शहरों को कनेक्ट करेगा हैदराबाद-बेंगलुरु - आईटी हब बेंगलुरु और हैदराबाद के बीच तेज कनेक्शन चेन्नई-बेंगलुरु - तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच हाई-स्पीड लिंक दिल्ली-वाराणसी - राजधानी दिल्ली को उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी से जोड़ेगा। इससे पर्यटन और व्यापार बढ़ेगा। वाराणसी-सिलीगुड़ी - पूर्वी भारत को मजबूत कनेक्टिविटी देगा, खासकर बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए फायदेमंद बड़ी घोषणाएं नया मालगाड़ी रास्ता: पश्चिम बंगाल के डानकुनी के लिए एक नए फ्रेट कॉरिडोर का ऐलान किया गया है। इंफ्रा पर बड़ा खर्च: अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपए का कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) तय किया गया है। यह पिछले साल के 11.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। रेयर अर्थ कॉरिडोर: केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में दुर्लभ खनिजों के लिए विशेष कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इसमें आंध्र प्रदेश को भी जोड़ा जाएगा ताकि खनिज संपन्न राज्यों को फायदा मिले। टेक्सटाइल सेक्टर: देश में बड़े टेक्सटाइल पार्क्स बनाए जाएंगे। दवाइयों के क्षेत्र में शक्ति: 10,000 करोड़ रुपए के निवेश के साथ बायो-फार्मा शक्ति योजना शुरू होगी, जिसके तहत तीन नए संस्थान खुलेंगे। चिप मैन्युफैक्चरिंग: भारत अपना सेमीकंडक्टर मिशन आईएसएम 2.0 लॉन्च करेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स पर जोर: मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स के कलपुर्जे बनाने के लिए बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। -सरकार के तीन कर्तव्य निर्मला सीतारमण ने बजट प्रस्तुत करते हुए सरकार के तीन महत्वपूर्ण कर्तव्यों का उल्लेख किया... - हमारा पहला कर्तव्य आर्थिक विकास को तेज और सतत बनाए रखना है। - हमारा दूसरा कर्तव्य अपने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमताओं का निर्माण विकसित करना है। - हमारा तीसरा कर्तव्य- सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप विकास है। -आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए छह प्रमुख पहलें सीतारमण ने कहा कि सरकार ने आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों में पहलों का प्रस्ताव किया है, जिनसे उद्योग, रोजगार और समग्र विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। -आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए सात क्षेत्रों में पहल शुरू करने का प्रस्ताव। रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण को तेज करना। -विरासत के औद्योगिक क्षेत्रों का कायाकल्प करना। -चैंपियन एमएसएमई का निर्माण करना। -अवसंरचना को सशक्त प्रोत्साहन प्रदान करना। -दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करना। -शहरों में आर्थिक क्षेत्र विकसित करना। बजट झरोखा टैक्स... विदेश यात्रा और पढ़ाई पर मिली बड़ी राहत, टूर पैकेज पर टीसीएस घटकर 2 प्रतिशत हुआ; टीडीएस दरें भी घटीं स्वास्थ्य जगत सस्ती दवाइयां, 2.5 लाख नौकरियां, 3 नए आयुर्वेदिक संस्थान; स्वास्थ्य बजट के बड़े एलान खेती-किसानी बजट में छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ा एलान, आय में इजाफा करने पर होगा सरकार का फोकस विशेष पैकेज बुनियादी ढांचा विकसित करने पर जोर, कैपेक्स बढक़र 12.2 लाख करोड़; रेयर अर्थ मिनरल्स पर खास ध्यान खेल जगत खेलो इंडिया मिशन के साथ खेल सेक्टर को बड़ा बूस्ट, खेल-कूद के सामानों के लिए समर्थ पहल पांच साल में बड़ा निवेश सेमीकंडक्टर में मिशन 2.0 का एलान, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए खुला 40,000 करोड़ का पिटारा स्वास्थ्य क्षेत्र बायो-फार्मा शक्ति मिशन, खुलेंगे 3 नए अखिल भारतीय संस्थान; वित्त मंत्री के बड़े एलान उद्यमियों को सौगात बजट में रोजगार के अवसर बढ़ाने और एमएसएमई क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं; ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा अब इनकम टैक्स चोरी पर नहीं होगी जेल अगर आप भी इनकम टैक्स के सख्त नियमों और स्क्रूटनी की प्रक्रियाओं से डरते थे, तो वित्त वर्ष 2026-27 का बजट आपके लिए राहत की बड़ी सांस लेकर आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए साफ कर दिया है कि सरकार अब टैक्सपेयर्स पर भरोसा जताने की नीति पर काम कर रही है। सबसे बड़ी घोषणा यह है कि अब इनकम टैक्स छिपाने पर जेल की हवा नहीं खानी पड़ेगी। इसके अलावा, विदेश यात्रा से लेकर प्रॉपर्टी खरीदने तक के नियमों में आम आदमी की जेब और सहूलियत का पूरा ख्याल रखा गया है। जेल नहीं, सिर्फ जुर्माना टैक्सपेयर्स के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि सरकार ने इनकम टैक्स कानून को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि अगर किसी करदाता की आय में गड़बड़ी पाई जाती है या टैक्स छिपाया गया है, तो अब उसे जेल की सजा नहीं होगी। ऐसे मामलों में केवल जुर्माना भरकर मामला रफा-दफा किया जा सकेगा। यह नया बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ‘नए इनकम टैक्स एक्ट’ का हिस्सा होगा। सरकार का मकसद टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना है, न कि करदाताओं को डराना। साथ ही, जिनके पास विदेशों में अघोषित संपत्ति है, उन्हें भी एक मौका दिया गया है। वे अगले 6 महीनों के भीतर डिस्क्लोजर स्कीम के तहत अपनी संपत्ति की जानकारी दे सकते हैं। विदेश यात्रा और पढ़ाई पर बड़ा फायदा अगर आप विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं या अपने बच्चों को पढऩे के लिए बाहर भेजना चाहते हैं, तो यह बजट आपकी जेब पर बोझ कम करने वाला है। पहले विदेशी टूर पैकेज पर टीसीएस की दरें काफी ऊंची थीं, जो 5 प्रतिशत से लेकर 20 प्रतिशत तक होती थीं। इससे बजट बिगड़ जाता था। अब सरकार ने इसे घटाकर सीधा 2 प्रतिशत कर दिया है। चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या फिर विदेश यात्रा का पैकेज, अब आपको केवल 2 प्रतिशत टीसीएस देना होगा। एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान अब तक अगर कोई निवासी किसी एनआरआई से भारत में प्रॉपर्टी खरीदता था, तो टीडीएस काटने के लिए उसे ‘टैन नंबर’ लेने की जरूरत पड़ती थी। यह एक आम खरीदार के लिए सिरदर्द जैसा था। बजट में इसे खत्म कर दिया गया है। अब प्रॉपर्टी खरीदार सीधे टीडीएस काट सकेगा और उसे अलग से टैन नंबर के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही, जिन निवेशकों का पैसा कई कंपनियों में लगा है, उनके लिए फॉर्म 15जी और 15एच की प्रक्रिया सरल कर दी गई है। अब डिपॉजिटरी इन फॉम्र्स को स्वीकार कर सीधे संबंधित कंपनियों को भेज सकेंगी, जिससे निवेशकों का काम घर बैठे हो जाएगा। बजट में एमएसएमई पर जोर यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते की झलक आम बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। अमेरिकी टैरिफ से मचे वैश्विक हडक़ंप के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश का आम बजट पेश कर दिया है। वित्त मंत्री ने बजट में अपना पूरा जोर एमएसएमई सेक्टर को दिया है, जिससे यूरोपीय बाजार में इसका लाभ मिल सके। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में एमएसएमई को विकास के रास्ते का अहम साथी बताया। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि चैंपियन की तरह हम उन्हें बढ़ाएं। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने एमएसएमई सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपए देने की घोषणा की ताकि उद्यमियों को इसका सीधा फायदा मिल सके। बजट में किए गए ऐलान से निर्यातकों और उत्पादकों दोनों को लाभ होगा। देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजट में बड़ा ऐलान किया गया है। लंबे समय से यह क्षेत्र इस बात की मांग करता रहा है कि विनिर्माण इकाइयों के लिए पूंजी की लागत कम की जाए, ताकि उत्पादन और प्रतिस्पर्धा दोनों को बढ़ावा मिल सके। बजट में जिस तरह से 10 हजार करोड़ के पैकेज का ऐलान किया गया है उससे छोटे और मझोले उद्यमों को सस्ती वित्तीय सहायता मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 202627 के लिए आम बजट पेश कर दिया है, जिसमें सरकार की आय, व्यय और नीतिगत प्राथमिकताओं का विस्तृत खाका सामने रखा गया इस बजट में लगभग सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए घोषणाएं की गई हैं, लेकिन विशेष रूप से देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज सेक्टर पर सरकार का फोकस साफ़ दिखाई देता है। टैरिफ वॉर के दबाव को कम करेगा एमएसएमई सेक्टर वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट कर्तव्य भवन में तैयार किया गया है, इसलिए इसका मूल उद्देश्य समावेशी विकास और राष्ट्रीय कर्तव्यों की पूर्ति है। बजट 2026 को तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित बताया गया है, जिनमें विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा शामिल हैं। सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को रोजगार सृजन, नवाचार और निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार मानते हुए कई बड़े कदम उठाए हैं। मौजूदा समय में दुनियाभर के देशों में बढ़ते तनाव और टैरिफ वॉर को देखते हुए घरेलू उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता बन गया है। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन हब के रूप में विकसित करने के लिए व्यापक सुधार किए जाएंगे। छोटे कारोबार को मुख्यधारा में लाने में मिलेगी मदद बजट 2026 में मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को केंद्र में रखा गया है। इसके साथ ही उन पुराने और बंद हो चुके औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करने पर भी जोर दिया गया है, जो किसी समय रोजगार और उत्पादन का बड़ा स्रोत थीं। एमएसएमई सेक्टर में समानता और समावेशन को बढ़ावा देने से जुड़ी योजनाओं के लिए सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे छोटे उद्यमों को मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी। महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू करने की घोषणा वित्त मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत 2,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन की घोषणा की है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को दोबारा सक्रिय करने और लघु उद्योगों को मजबूती देने के लिए 7,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, हथकरघा और पारंपरिक उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में 350 से अधिक सुधार लागू किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई और औद्योगिक विकास को गति देना है। बायोफार्मा और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नई नीतियां तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि उच्च मूल्य वाले उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटन किया गया है, जिससे भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे लाने की कोशिश की जाएगी। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन करेगा एमएसएमई सेक्टर बजट से पहले एमएसएमई सेक्टर को कई उम्मीदें थीं। उद्योग जगत टैक्स प्रणाली को सरल बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को कम करने और नकदी प्रवाह सुधारने की मांग कर रहा था। खास तौर पर जीएसटी रिफंड में तेजी, निर्यात से जुड़े क्लेम्स के शीघ्र निपटान और फंसी हुई वर्किंग कैपिटल को मुक्त करने पर जोर दिया जा रहा था। बजट 2026 में इन अपेक्षाओं को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया गया है। कुल मिलाकर, यह बजट एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देकर आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। बजट में सियासी तडक़ा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। केंद्र सरकार ने इस बजट में चुनावी राज्यों का ख्याल रखते हुए उन्हें कई तोहफे दिए। सरकार ने इस बजट में किसी को हाईस्पीड रेल नेटवर्क तो किसी को वाटर वे का सौगात दिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने समुद्र तट से सटे राज्यों ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में विशेष कॉरिडोर बनाने का एलान किया है। निर्मला सीतारमण ने बजट के दौरान कहा कि ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में डेडिकेटेड मिनरल पार्क बनाए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने वाराणसी से सिलीगुड़ी तक रेल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा है। केरल और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने का भी उन्होंने बजट में प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे मिनरल से भरपूर राज्यों को माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने में मदद करने का प्रस्ताव रखते हैं। हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ेगा तमिलनाडु केंद्र की मोदी सरकार ने बजट में चुनावी राज्य तमिलनाडु पर सौगातों का बरसात कर दिया है। वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए एलान किया कि सरकार इस साल तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से लेकर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण करेगी। इसके साथ ही चेन्नई-बेंगलुरु तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच हाई-स्पीड लिंक बनाया जाएगा। इतना ही नहीं वित्त मंत्री ने ये भी बताया कि तमिलनाडु में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के लिए विशेष कॉरिडोर स्थापित किया जाएगा। बंगाल को भी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का तोहफा केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने एलान किया कि सरकार दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण करगी। इससे प्रमुख तौर पर बंगास से राजधानी दिल्ली तक सफर करने वाले यात्रियों को लाभ होगा और वह कम समय में एक शहर से दूसरे शहर यात्रा कर सकेंगे। बजट में कोकोनट प्रमोशन स्कीम का एलान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए दक्षिण भारत के प्रमुख फसलों में शामिल नारियल के उत्पादन और कॉम्पिटिशन को बढ़ाने के लिए कोकोनट प्रमोशन स्कीम ( नारियल संवर्धन योजना) का एलान किया। उन्होंने इसके बारे में बताते हुए कहा कि इस स्कीम का उद्देश्य नारियल के उत्पादन अलग-अलग तरीकों से बढ़ाना है। इसमें मुख्य नारियल उगाने वाले राज्यों में बेकार पेड़ों की जगह नई किस्म के पौधे लगाना शामिल है। भारतीय काजू और कोको के लिए एक खास प्रोग्राम का प्रस्ताव है ताकि भारत कच्चे काजू और नारियल के उत्पादन और प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बन सके, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े और 2030 तक भारतीय काजू और भारतीय कोको को प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड में बदला जा सके। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को बर्डिंग ट्रेल का तोहफा केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पुलिकट झील के किनारे बर्डिंग ट्रेल बनाने का एलान किया। बता दें कि बर्डिंग ट्रेल प्रकृति प्रेमियों के लिए एक विशेष रूप से चिन्हित रास्ता होता है, जिसे पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने, पहचानने और अध्ययन करने के लिए विकसित किया जाता है। ये मार्ग आमतौर पर ग्रामीण, तटीय या जंगली क्षेत्रों में बनाया जाता है। पूर्वोत्तर को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का तोहफा इसके साथ ही केंद्र सरकार ने पूर्वोदय राज्यों में ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का एलान किया है। जिसमें दुर्गापुर को प्रमुख नोड के रूप में शामिल किया जाएगा। साथ ही पांच पूर्वोदय राज्यों में पांच पर्यटन स्थलों के बनाने और 4,000 ई-बसों को चलाने का एलान किया गया है। नॉर्थ ईस्ट में होगा बुद्ध सर्किट का निर्माण केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट के दौरान कहा कि नॉर्थ ईस्टर्न रीजन महायान/वज्रयान परंपराओं का एक सभ्यतागत संगम है। ऐसे में मोदी सरकार ने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बुद्ध सर्किट बनाएगी। इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थयात्रा व्याख्यान केंद्र, और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं शामिल होंगी। मछुआरों के लिए खास एलान बजट में केंद्र सरकार ने मछुआरों के लिए भी खास एलान किया है। केंद्र सरकार के एलान के मुताबिक अब अगर भारतीय मछुआरे भारतीय सीमा वाले समुद्री इलाके या खुले समुद्र में मछली पकड़ते हैं, तो उन्हें उस मछली पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं देना होगा। इसके अलावा अगर वे वह मछली किसी विदेशी बंदरगाह पर उतारते हैं, तो इसे निर्यात माना जाएगा। बता दें कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ तमिलाडु और आंध्र प्रदेश के मछुआरों को होगा। विनोद उपाध्याय / 01 फरवरी, 2026