यह दुनिया में लोग अपने अपने पद, पैसा और सत्ता या धन के लिए लालायित रहते हैं अभी दो दिन पहले ही महाराष्ट्र के उप मुख्य मंत्री स्व अजीत पवार जी का विमान क्रैश हुआ और मौत हो गईं शायद वे सत्ता में नहीं रहते तो प्राइवेट जेट नहीं मिलता और जान बच सकती लेकिन तुरंत ही शनिवार 31 जनवरी 26 की शाम को अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने लोकभवन में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना पहले से तय नहीं था, पति अजित की प्लेन क्रैश में निधन के बाद ऐसी राजनीतिक हालत बने लेकिन सच में ऐ पता हमें नहीं होता की सत्ता बड़ा है या हमारा विचार, ईश्वर को पहचाना जरूरी है यदि बनना ही था तो कम से कम उनका क्रिया क्रम कराकर बाद में भी निर्णय लिया जा सकता था इसलिए ऐ केवल एक उदाहरण नहीं है कई ऐसी घटना है कि पति के मरते ही पत्नी उसकी जायदाद पर काबू कर करने की कोशिश करती है इसलिए आपका अपना भगवान राम के सिवा क़ोई नहीं है समय बर्बाद ना करो उसी में लीन हो जाना सबकुछ मिलेगा क्योंकि शांति से बढ़कर कुछ नहीं है अच्छी बातचीत एक स्वस्थ रिश्ते का मूलभूत हिस्सा है। जब आप अपने साथी के साथ सकारात्मक भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं, तो आप सुरक्षित और खुश महसूस करते हैं। जब लोग अच्छी तरह से संवाद करना बंद कर देते हैं, तो उनके बीच संबंध भी खराब हो जाते हैं, और बदलाव या तनाव के समय यह दूरी और भी बढ़ जाती है। इस सृष्टि का निर्माण निराकार सुप्त ऊर्जा से हुआ है जिसको कि हम श्याम कह सकते हैं मतलब अंधकार पूर्ण ऊर्जा है लेकिन इसमें किसी साधक को प्रकाश भी दिखाई देता है समस्त ब्रह्मांड का मालिक केवल परमपिता परमेश्वर भगवान राम ही है जिसका क़ोई रंग नहीं है रंगहीन है ईश्वर जैसे पानी जिसमें क़ोई रंग नहीं होता है लेकिन यदि उसमें एक छोटा सा कीड़ा पड़ जाता है तो स्पष्ट दिखाई देता है वैसे ही श्वेत प्रकाश जिसमें क़ोई रंग नहीं है लेकिन किसी प्रिज्म से गुजरता है तो सात रंगों से विभक्त हो जाता है जिसे विब्ज़ीओर वायलेट, इंडिगो, ब्लू, ग्रीन, येलो, ऑरेंज, रेड) विज़िबल लाइट स्पेक्ट्रम के रंगों को दिखाता है, जिन्हें बढ़ती वेवलेंथ के हिसाब से छोटे (वायलेट: 380-450 nm) से लेकर लंबे (रेड: 620-750 nm) क्रम में रखा गया है, जिसमें हर रंग की एक खास नैनोमीटर (nm) रेंज होती है, जो इंद्रधनुष और रंग देखने की क्षमता को समझाने में मदद करती है।गुलाबी, बैगनी, हरा, लाल पीला,यानी जो भी रंग है उसमें पारदर्शिता नहीं है अतः रंग माया है और जिसमें क़ोई रंग नहीं है वो पारदर्शी है जिसमें हर कुछ दीखता है जैसे शीशा पारदर्शी है इस कारण मनुष्य रंगों के चक्कर में भटकता रहता है क़ोई गोरा दीखता है क़ोई काला और गोरा को सुन्दर पाकर बहुत खुश होता है और पत्नी बनाकर माया के जाल में भटकता रहता है लेकिन उसके विचारों पर ध्यान नहीं देता विचार महत्वपूर्ण है रंग नहीं क्योंकि उसका एक दिन नष्ट होना तय है और जब शरीर का नाश होता है तो मानव निश्चित ही एक योनि से दूसरे योनि में भटकता रहता है मानव योनि में कुछ विशेष लोगों जो राम भक्त होते हैं उन्हें शक्तियां प्रदान कर देता है जो आम जनमानस को मार्गदर्शन करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर प्रभु राम के द्वारा प्रदत शक्ति से उसका कल्याण करते हैं। गुरु तत्व वास्तव में ईश्वर ही तत्व है जब तक में गुरु और ईश्वर को एक नहीं मानना सीखोगे तब तक में तुम ना गुरु को पहचान पाओगे और ना ही ईश्वर को पहचान पाओगे। भगवान राम को ईश्वर मानने का अर्थ यह हो जाता है कि तुम उस राम की शक्ति के माध्यम से ही ईश्वर के पास पहुंचोगे। बिना राम की भक्ति और समर्पण के कोई भी शक्ति तुम्हारी सहायता नहीं कर सकती। इसको क्वांटम फिजिक्स से समझो जो डिस्टोर्टेड एनर्जी है क्वांटम फील्ड जो बिगड़ चुकी है उसके अंदर जब तक में सिंक्रोनाइजेशन नहीं होगा कोहरेंस नहीं होगा तब तक में और शक्ति बढ़ेगी नहीं और जब बढ़ेगी नहीं तो तुम्हारा कल्याण क्या होगा। इस कारण गुरु को समर्पण बहुत आवश्यक है और समय आने पर धीरे-धीरे गुरु शक्ति अपने को ईश्वरीय शक्ति में विलीन कर लेती है और एक अवस्था के बाद तुमको खुद श्रम करके आगे बढ़ना होता है वहां पर भगवान राम और भक्त अपनी साधना से उनके चरणों में पहुँचने का मार्ग पता हैं और सारे कष्ट से मुक़्त होता है । (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 2 फरवरी /2026