राष्ट्रीय
02-Feb-2026


50 शहरों का इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ल्ड क्लास की तर्ज पर बनेगा, फॉरेक्स रिजर्व भी बढ़ेगा नई दिल्ली,(ईएमएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को केंद्र सरकार का 2026-27 का बजट पेश किया था। बजट में पयर्टन को बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएं की गईं। वित्त मंत्री की घोषणा के मुताबिक देश के 50 शहरों का इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ल्ड क्लास लेवल की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय पयर्टकों के लिए तैयार किया जाएगा। इसका मकसद भारत को ऑल-सीजन डेस्टिनेशन और ग्लोबल टूरिस्ट-हब बनाना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस प्लान की मदद से एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो जाएगा, जिससे टियर 2-3 शहरों और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इससे देश का फॉरेक्स रिजर्व भी बढ़ेगा, साथ ही सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बजट में 2,438.40 करोड़ रुपए दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक 10 करोड़ विदेशी पर्यटक भारत आएं। 2034 तक भारत की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 43.25 लाख करोड़ तक हो सकता है। 6.3 करोड़ लोगों को रोजगार देने में सक्षम होगा। पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल करीब एक करोड़ विदेशी पर्यटक आते हैं। इनमें से 6–7फीसदी बौद्ध पर्यटक होते हैं। पिछले साल 7.10 लाख बौद्ध पर्यटक भारत आए। पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए इस बार 6,812 करोड़ रुपए का बजट दिया है। यह राशि पिछले बजट से 20फीसदी ज्यादा है। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट का विकास किया जाएगा। धार्मिक शहर के तौर पर पहचाने जाने वाले शहरों में बुनियादी सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की जरूरतों के मुताबिक विकसित की जाएंगी। इसमें उत्तर प्रदेश के वाराणसी और मथुरा, जम्मू-कश्मीर का जम्मू, उत्तराखंड के ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे शहरों पर फोकस रहेगा। दक्षिण में तमिलनाडु के मदुरै और कांचीपुरम, कर्नाटक का हम्पी, आंध्र प्रदेश का तिरुपति, ओडिशा का भुवनेश्वर और पुरी को विकसित किया जाएगा। वहीं इस लिस्ट में पश्चिम बंगाल का बिश्नुपुर, मध्य प्रदेश का उज्जैन और खजुराहो, गुजरात का द्वारका और महाराष्ट्र का पंढरपुर शामिल होंगे। लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, लेह पैलेस, आदिचनल्लूर, हस्तिनापुर जैसे देश के 15 पुरातात्विक स्थल एक्स्पिीरियंशियल कल्चरल डेस्टिनेशन्स के रूप में विकसित होंगे। यहां पर्यटक इतिहास को जीवंत रूप में महसूस कर सकेंगे। यहां पर्यटकों के लिए वॉकवे और इमर्सिव स्टोरीटेलिंग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर में माउंटेन ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे। इसे एडवेंचर टूरिज्म के तौर पर प्रचारित किया जाएगा। पूर्वी घाट के अरकू वैली और पश्चिमी घाट के पोधीगई मलई में भी माउंटेन ट्रेल्स बनेंगे। ओडिशा, कर्नाटक और केरल में टर्टल ट्रेल्स बनेंगे। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे। इन टिकाऊ विकास के पर्यटन मॉडल से पर्यावरण संरक्षण करेंगे। सिराज/ईएमएस 02फरवरी26 -----------------------------------