बंदूक चलाने से लेकर जूडो-कराते तक की देंगे ट्रेनिंग हिंदू उत्सव समिति लव-जिहाद रोकने तैयार करेगी वार्डवार महिला नेटवर्क भोपाल (ईएमएस)। हिंदू उत्सव समिति ने लव जिहाद की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से वार्ड और मोहल्ला स्तर पर महिला सदस्यों का संगठित नेटवर्क तैयार करने की विस्तृत रणनीति बनाई है। समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि संगठन अब केवल पर्व-त्योहारों तक सीमित भूमिका में नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक स्तर पर निरंतर और जमीनी हस्तक्षेप करेगा। उनका कहना है कि उत्सव तभी सार्थक है, जब समाज और परिवार सुरक्षित व खुशहाल हों। तिवारी के अनुसार समिति हर वार्ड और मोहल्ले में युवक-युवतियों की संयुक्त टीमें बनाएगी। इन टीमों में महिलाएं केंद्रीय भूमिका में होगी। महिला सदस्य घर-घर जाकर माताओं, बहनों और युवतियों से संवाद करेंगी और उन्हें सतर्कता व जागरूकता के बिंदुओं पर समझाइश देंगी। समिति का तर्क है कि महिलाओं से जुड़े संवेदनशील विषयों पर महिलाओं की बात अधिक प्रभावी होती है, इसलिए अभियान की कमान मातृशक्ति को सौंपी जा रही है। घर-घर संपर्क, मोहल्ला स्तर पर टीम मॉडल समिति ने अभियान के लिए क्षेत्र-आधारित टीम मॉडल तैयार किया है। अध्यक्ष के मुताबिक वार्ड का दायरा बड़ा होने के कारण हर मोहल्ले या बस्ती के हिसाब से अलग-अलग टीमें गठित की जाएंगी। उदाहरण के तौर पर पटेल नगर बस्ती में करीब 2000 परिवार हैं। यहां पांच टीमें बनाई जाएंगी, जो अपने-अपने क्षेत्र में नियमित संपर्क कर परिवारों से संवाद करेंगी। हर टीम में युवक और युवतियां मिलकर काम करेंगे, ताकि संवाद संतुलित और प्रभावी रहे। महिला सदस्यता पर विशेष जोर हिंदू उत्सव समिति ने एक वर्ष में एक लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें 35 से 40 फीसदी सदस्य महिलाएं और 18 वर्ष से अधिक आयु की युवतियां होंगी। तिवारी ने बताया कि संगठन के आंतरिक चुनाव और मतदान प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए वयस्क सदस्यों को ही जोड़ा जाएगा। माताओं, बहनों और युवतियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग-अलग स्तर पर संवाद और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। जूडो-कराते से हथियार संचालन तक समिति की रणनीति का अहम हिस्सा आत्मरक्षा प्रशिक्षण है। अध्यक्ष के मुताबिक फिलहाल संगठनात्मक ढांचा और टीमों का गठन किया जा रहा है। इसके बाद करीब छह महीने में चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होंगे। इन कार्यक्रमों में जूडो-कराते, दंड अभ्यास, मलखंब जैसी शारीरिक ट्रेनिंग शामिल होगी। इसके साथ ही जरूरत पडऩे पर हथियार संचालन से जुड़ा प्रशिक्षण देने की भी योजना है। ट्रेनिंग के लिए समिति से जुड़े सेवानिवृत्त कर्मियों, सुरक्षा बल का अनुभव रखने वाले लोगों और मार्शल आर्ट प्रशिक्षकों की मदद ली जाएगी। अलग-अलग स्थानों पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इसमें भाग ले सकें। समिति का दावा है कि इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और किसी भी अप्रिय स्थिति में खुद को संभालने में सक्षम होंगी। अभियान की कार्यप्रणाली और समय-सारिणी सदस्यता अभियान हर महीने तय तारीखों में चलाया जाएगा। महीने की पहली तारीख से 10 या 15 तारीख तक फार्म भरे जाएंगे। इसके बाद शेष अवधि में समिति कार्यालय से फार्मों का संकलन, रिकॉर्ड तैयार करने और सदस्यता कार्ड जारी करने का काम होगा। अगले चरण में अन्य धर्म स्थलों और क्षेत्रों में अभियान का विस्तार किया जाएगा। समिति पहले प्रबुद्ध नागरिकों, वरिष्ठ महिलाओं और सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों को अभियान की रूपरेखा समझाएगी। इसके बाद टीमें मोहल्लों में भेजी जाएंगी, जो नियमित अंतराल पर संपर्क अभियान चलाएंगी। समिति का कहना है कि यह अभियान केवल सदस्यता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं की जागरूकता, आत्मरक्षा और सामाजिक संवाद को मजबूत करने की दिशा में दीर्घकालिक पहल के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।