क्षेत्रीय
02-Feb-2026
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भाई की रिहाई के लिए बहन के प्रयासों ने लाया रंग वर्ष 2019 से सुनील अदे के नाम से पाकिस्तान की जेल में बंद था प्रसन्नजीत बालाघाट (ईएमएस). सात साल का वनवास भोगने के बाद बालाघाट जिले का प्रसन्नजीत रंगारी पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गया। वह वर्ष 2019 से पाकिस्तान की जेल में सुनील अदे के नाम से बंद था। प्रसन्नजीत की रिहाई की जानकारी परिजनों को 1 फरवरी को खैरलांजी थाना से मिली। प्रसन्नजीत वर्तमान समय में रेड क्रॉस भवन मजीठा रोड और गुरु नानक देव हॉस्पिटल के अंदर अमृतसर में है। जिसे लेने के लिए उसका जीजा राजेश और अन्य लोग पंजाब प्रांत गए हैं। प्रसन्नजीत की रिहाई के लिए उसकी बहन संघमित्रा ने काफी प्रयास किए। वर्ष 2017-18 के बाद एक बेटा अपनी मां से मिल पाएगा। जबकि बेटे के इंतजार में पिता की मौत हो चुकी है। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान ने 31 जनवरी को 7 भारतीय कैदियों की रिहाई की है। जिसमें 6 पंजाब राज्य के और एक मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले का प्रसन्नजीत शामिल है। वर्ष 2021 में जानकारी मिलने के बाद उनकी बहन संघमित्रा ने भाई के वतन वापसी के लिए प्रयास शुरु किए थे। इसके लिए उन्होंने अनेक पत्र लिखें। प्रसन्नजीत की रिहाई इतनी आसान नहीं थी। वह सालों से अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटते रही। नेताओं के दरवाजों को भी खटखटाया। बीते साल प्रसन्नजीत के नाम बहन ने चि_ी लिखी थी। यह खबर नेशनल मीडिया की सुर्खियां बनी। इधर प्रसन्नजीत के वेरिफिकेशन के दस्तावेज भी उसी दिन आए थे, जिस दिन संघमित्रा और उसके पिता लोपचंद रंगारी की मौत हुई थी। बेटे के इंतजार में वह दुनिया से चल बसे और मां को लगता रहा कि उनका बेटा अब जबलपुर में है। वह मानसिक रूप से बीमार है और पड़ोसियों से खाना लेकर अपना गुजारा कर रहा है। रिहाई की ऐसे मिली जानकारी प्रसन्नजीत की रिहाई की खबर उन्हें खैरलांजी पुलिस थाना से 1 फरवरी को मिली। इसके बाद उन्हें लगातार अमृतसर के थाने से फोन आए। प्रसन्नजीत को जल्दी ही वापस लाने की बात करने लगे। प्रसन्नजीत की आवाज सालों बाद उनकी बहन संघमित्रा ने सुनी, लेकिन उनके भाई ने बहन की आवाज पहचान नहीं पाया। बहन ने कहां भाई तू घर आजा तब उनके भाई ने कहां मेरे पास टिकट नहीं है। तुम ही मुझे लेने के लिए आओ। अब प्रसन्नजीत के जीजा राजेश उन्हें लेने के लिए अमृतसर गए हैं। इस तरह से हुई रिहाई पाकिस्तान से सात भारतीय नागरिकों को रिहा किया गया था। उन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीएसएफ के हवाले किया गया। भारत ने कस्टम और इमिग्रेशन की प्रोसेस पूरी करने के बाद सभी का नानकदेव अस्पताल में मेडिकल जांच की गई। उनके स्वस्थ होने की पुष्टि होने के बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जा रहा है। सात नागरिकों में 6 तो अपने परिजनों और घर तक पहुंच गए। लेकिन प्रसन्नजीत अब भी रेड क्रॉस भवन मजीठा रोड और गुरु नानक देव हॉस्पिटल के अंदर अमृतसर में है। उसकी जिम्मेदारी एएसआई जसविंदर सिंह के पास है। वर्ष 2017-18 में हुआ था लापता प्रसन्नजीत रंगारी वर्ष 2017-18 को घर से लापता हुआ था। वह बिहार चले गया था, लेकिन उस समय वह लौट आया। लेकिन अचानक वह फिर से घर से लापता हो गया। घर वालो ने लंबे समय तक उसकी तलाश की और उसे मरा हुआ मान लिया था। दिसंबर 2021 में उन्हें अचानक एक फोन आया और पता चला कि उनका भाई प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद है। 1 अक्टूबर 2019 में प्रसन्नजीत को पाकिस्तान के बाटापुर से हिरासत में लिया गया था। उस समय तक उस पर किसी तरह के आरोप तय नहीं हुए थे। वह सुनिल अदे के नाम से बंद था। अब वह पाकिस्तान की कैद से आजाद है। बी फार्मेसी की हासिल की थी डिग्री बालाघाट जिले के खैरलांजी में रहने वाला प्रसन्नजीत रंगारी पढ़ाई में तेज था। कर्ज लेकर उनके पिता लोपचंद रंगारी ने उन्हें जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से बी. फार्मेसी की पढ़ाई करवाई थी। पढ़ाई पूरी कर साल 2011 में एमपी स्टेट फॉर्मसी काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन किया था। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई करना चाहता था, लेकिन मानसिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई छोडकऱ घर आ गया। भानेश साकुरे / 02 फरवरी 2026