छिंदवाड़ा जबलपुर (ईएमएस)। सीएमएचओ कार्यालय में लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने सोमवार दोपहर कार्यालय में पदस्थ कम्प्युटर ऑपरेटर को ५० हजार रू की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। कार्यालय में लोकायुक्त टीम की दबिश के बाद हड़कम्प मच गया। मामले को लेकर देर शाम तक कार्यालय में गहमा गहमी का माहौल रहा। मामले में लोकायुक्त निरीक्षक ब्रजमोहन नरवारिया ने बताया कि रोहना कला में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा बरकड़े दिव्यांग होने के साथ किडनी की गम्भीर बीमारी से जूझ रही है नर्सिंग ऑफिसर ने बेहतर इलाज के लिए सीएमएचओ कार्यालय में अटैचमेंट के लिए आवेदन दिया था। साथ ही पिछले दिनो जनसुनवाई मे भी अपनी समस्या कलेक्टर के सामने रखी थी। नर्सिंग ऑफिसर की इस गम्भीर समस्या को देखते हुए कलेक्टर ने सीएमएचओ को निर्देश जारी किए थे कि उक्त नर्सिंग ऑफिसर को सीएमएचओ कार्यालय में ही पदस्थ किया जाए, लेकिन जब नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा बरकड़े कलेक्टर का आदेश लेकर सीएमएचओ कार्यालय पहुंची तो यह पदस्थ संविदा कर्मी कम्प्युटर ऑपरेटर जितेन्द्र यदुवंशी ने उनसे पद स्थापना के लिए ५० हजार रूपये की मांग की और पैसे ना देने पर आदेश में देरी कर रहा था। उन्होनें बताया कि लगातार पैसों की मांग से परेशान होकर पीड़िता पुष्पा बरकड़े ने लोकायुक्त जबलपुर में मामले की शिकायत कराई थी। शिकायत के बाद सोमवार को लोकायुक्त की टीम करीब ढाई बजे सीएमएचओ कार्यालय पहुंची और कार्यालय में ही संविदा कर्मी को ५० हजार की रिश्वत लेते पकड़ा है। लोकायुक्त ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया। आरोप: बिना पैसे लिए नहीं होते काम सीएमएचओ कार्यालय में सोमवार को रिश्वत का मामला सामने आने के बाद अब पीड़ित और कर्मचारी भी अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पीड़ितों का कहना है कि सीएमएचओ कार्यालय में छोटे से छोटे काम के लिए अधिकारी और कर्मचारी हमेशा पैसों की चाह रखते हैं। यदि उन्हें मन मुताबिक दक्षिणा दी जाती है तो काम पूरा हो जाता है। नही दी जाती तो मामले को लटका कर रखा जाता है। इसी के चलते पीड़ित को यह फैसला लेना पड़ा। सीएमएचओ कार्यालय में मचा हड़कंप कार्यालय के कम्प्यूटर ऑपरेटर के रिश्वत लेने की खबर कार्यालय में जंगल में आग की तरह फैल गई। इधर अपने पकड़े जाने के बाद कम्प्यूटर ऑपरेटर भी हक्का-बक्का रह गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि उक्त नर्सिंग ऑफिसर उसे इस मामले में फंसा देगी। वहीं पुलिस का कहना है कि उसने यह कदम परेशान होकर उठाया है। ५० हजार से कम में नहीं होगा काम पीड़िता का आरोप है कि अटैचमेंट के लिए उससे कम्प्यूटर ऑपरेटर ने ५० हजार रूपए की रिश्वत की मांग की थी। जब उसने २० हजार रूपए देने कहा था तो कम्प्यूटर ऑपरेटर ने साफ शब्द में कहा कि साहब ५० से कम में नहीं मानने वाले पूरे पैसे देने पड़ेंगे। ईएमएस / 02 फरवरी 2026