छिंदवाड़ा जबलपुर (ईएमएस)। जबलपुर संभाग की सबसे बड़ी मंडियों में शुमार और हर साल करोड़ों का राजस्व देने वाली छिंदवाड़ा कृषि उपज मंडी इन दिनों कर्मचारियेां की कमी के कारण अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। हैरानी की बात यह है कि साल भर अनाज की आवक वाली इस मंडी का संचालन केवल दो इंस्पेक्टरों के भरोसे किया जा रहा है जबकि चाहिए कम से कम नौ। मंडी परिसर में मैदानी व्यवस्था संभालनें में इन इंस्पेक्टर या निरीक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इनके सहयोग के लिए यहां उप निरीक्षक रहते हैं लेकिन वे भी पूरी संख्या में नहीं हैं। नियमानुसार यहां पर्याप्त संख्या में निरीक्षक, उपनिरीक्षक, लिपिक, चौकीदार और अन्य कर्मचारी तैनात होने चाहिए लेकिन लंबे समय से पद भरे नहीं गए हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते नीलामी प्रक्रिया, तौल, भुगतान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। प्रबंधन जो उपलब्ध हैं उन्हीं कर्मचारियों के जरिए किसी तरह मंडी का संचालन कर रहे हैं। मौजूद कर्मचारियों पर काम के अतिरिक्त दबाव के कारण व्यवस्थाएं चरमराती जा रहीं हैं। ए ग्रेड सचिव के साथ 7 निरीक्षक कम संभाग की बड़ी मंडी होने के कारण यहां सचिव पद पर ए और सी दो ग्रेड के सचिवों की नियुक्ति होनी चाहिए। लंबा समय हो गया छिंदवाड़ा मंडी में एक ग्रेड के सचिव पदस्थ ही नहीं हुए हैं। मौजूदा सचिव मनोज चौकीकर लगभग चार महीनें पहले आए हैं वे भी सी ग्रेड के हैं। सबसे ज्यादा कमी निरीक्षकों की हैं। छिंदवाड़ा मंडी में इसके 9 पद स्वीकृत हैं लेकिन फिलहाल 2 निरीक्षक ही पूरी मंडी संभाल रहे हैं। सहायक उपनिरीक्षक के भी दो पर रिक्त हैं। मंडी में पहले पर्याप्त स्टाफ था लेकिन तबादले और रिटायरमेंट के बाद यहंा नई पदस्थापना मंडी बोर्ड से हुई ही नहीं। एक इंस्पेक्टर का चार महीने पहले तबादला हुआ लेकिन उनकी जगह किसी को यहंा पदस्थ नहीं किया गया। दो उपनिरीक्षक अगले कुछ महीनों में ओर रिटायर होने वाले हैं। मुख्यलिपिक और सहायक लेखापाल भी नहीं कृषि उपज मंडी में बैक आफिस की बात करें तो यहंा भी कर्मचारियेां को टोटा है। एक लेखापाल है लेकिन उनके सहयोग के लिए 3 और सहायक लेखापाल के पद यहां स्वीकृत हैं तीनों खाली पडे हैं। मुख्य लिपिक के दो पदों का भी नई नियुक्ति का इंतजार हैं। सहायक ग्रेड के ही सभी नौ पदों पर फिलहाल कर्मचारी यहंा पदस्थ हैं। आफिस का कामकाज करने और सुरक्षा करने के चौकीदार और भृत्य तक का यहां टोटा है। चोरी और विवादों की आशंका परिसर में अनाज की ज्यादा आवक के समय परिसर से अनाज भरे बोरों के चोरी जाने की वारदातें भी होती आई है। मंडी के मैदानी कर्मचारी परिसर में तैनात रहें तो ये स्थितियां नहीं बन जाए। पिछले दिनों एक किसान और हम्माल के बीच मारपीट भी हुई। मंडी में नियम विरुद्ध लगे अनाजों के ढेर और छल्लियों को न लगाने के निर्देश देने के लिए भी कर्मचारी न होने पर अव्यवस्थाएं होती रहीं हैं। इनका कहना है मंडियों में कर्मचारियों की नियुक्तियां मंडी बोर्ड से होती है। संभागीय और प्रदेश स्तर की बैठक में कर्मचारियों की पदस्थापना केा लेकर लगातार अवगत कराया जाता है। परेशानी होती है लेकिन उसके बावजूद उपलब्ध कर्मचारियेां से यहंा व्यवस्था बनाने में हम लगे रहते हैं। मनोज चौकीकर, सचिव, कृषि उपज मंडी छिंदवाड़ा ईएमएस / 02 फरवरी 2026