नई दिल्ली (ईएमएस)। आयुर्वेद में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी समस्या के लिए एक प्राकृतिक उपाय मौजूद है। हार्ट की समस्या में अर्जुन के पेड़ की छाल बेहद उपयोगी मानी जाती है। आयुर्वेद में इसे हृदय-बल्य यानी हृदय को ताकत देने वाली औषधि के रूप में मान्यता प्राप्त है। अर्जुन का पेड़ भारत के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है, खासकर नदियों, तालाबों और जल स्रोतों के किनारे। इसकी छाल में ऐसे गुण हैं, जो हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं, रक्त प्रवाह को नियंत्रित करते हैं और दिल की धड़कन को नियमित रखने में मदद करते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं कि अर्जुन की छाल का नियमित सेवन ब्लड प्रेशर को संतुलित रखता है और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। यही कारण है कि इसे हृदय रोगों के उपचार और बचाव के लिए भरोसेमंद औषधियों में शामिल किया गया है। सिर्फ हृदय ही नहीं, अर्जुन की छाल अन्य स्वास्थ्य लाभों के लिए भी उपयोगी है। इसका लेप हड्डियों के फ्रैक्चर, सूजन और घावों पर लगाने से राहत देता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को दस्त, पेचिश, मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं में लाभकारी माना गया है। साथ ही खांसी, अस्थमा और सांस की तकलीफ जैसी समस्याओं में इसका काढ़ा या चूर्ण राहत प्रदान करता है। अर्जुन का सेवन सरल है। इसके लिए छाल का काढ़ा बनाकर पीना, दूध में उबालकर लेना या चूर्ण का उपयोग करना फायदेमंद रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार सुबह और शाम इसका सेवन करने से हृदय मजबूत होता है और शरीर की संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति बेहतर रहती है। हालांकि, इसे अधिक मात्रा में लेने से ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, इसलिए सेवन में सावधानी बरतना आवश्यक है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को चिकित्सक की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को हृदय स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक वरदान माना गया है। यह न केवल दिल को मजबूत बनाती है, बल्कि शरीर में विषैले तत्वों को बाहर निकालकर रक्त को शुद्ध करती है। सुदामा/ईएमएस 03 फरवरी 2026