-यह अवॉर्ड मई 2026 में स्टॉकहोम में ‘क्रैफोर्ड डेज में दिया जाएगा न्यूयार्क,(ईएमएस)। भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को ‘रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भू-विज्ञान में 2026 का क्रैफोर्ड अवॉर्ड देने का ऐलान किया है। भू-विज्ञान का नोबेल कहे जाने वाले इस अवॉर्ड के तहत रामनाथन को ‘सुपर-प्रदूषकों और वायुमंडलीय ‘ब्राउन क्लाउड्स पर दशकों तक किए गए उनके शोध के लिए दिया गया है, जिसने वैश्विक ताप वृद्धि की समझ को नई दिशा दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 82 साल के रामनाथन ने 1975 में नासा में काम करते हुए एक ऐतिहासिक खोज की थी। उन्होंने बताया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी), जो एरोसोल और रेफ्रिजरेशन में इस्तेमाल होते थे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 10,000 गुना ज्यादा प्रभावी तरीके से गर्मी खींचते हैं। रामनाथन ने कहा कि 1975 तक हम मानते थे कि वैश्विक ताप वृद्धि मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड के कारण होती है। उन्होंने कहा कि वह यह देखकर स्तब्ध है कि तकनीक और मानव गतिविधियां पर्यावरण को किस हद तक बदल सकती हैं। बता दें रामनाथन का जन्म मदुरै में हुआ और उनका पालन-पोषण चेन्नई में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सिकंदराबाद की एक रेफ्रिजरेटर फैक्टरी में इंजीनियर के रूप में की थी, जहां उन्होंने पहली बार सीएफसी पर काम किया, बाद में उन्होंने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी और भारतीय विज्ञान संस्थान से उच्च शिक्षा हासिल की। रिपोर्ट के मुताबिक क्रैफोर्ड अवॉर्ड के तहत रामनाथन को करीब 9 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि और एक स्वर्ण पदक दिया जाएगा। यह अवॉर्ड मई 2026 में स्टॉकहोम में आयोजित ‘क्रैफोर्ड डेज के दौरान प्रदान किया जाएगा। रामनाथन का शोध मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे अहम अंतरराष्ट्रीय समझौतों की बुनियाद बना, जिसने वातावरण में लाखों टन हानिकारक उत्सर्जन को जाने से रोका है। सिराज/ईएमएस 03फरवरी26