राष्ट्रीय
05-Feb-2026
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31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय की नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने ममता सरकार को कड़ा निर्देश देकर 31 मार्च 2026 तक महंगाई भत्ते (डीए) के कुल बकाया का 25 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दे दिया है। यह आदेश उस दिन आया है जब बंगाल विधानसभा में लेखानुदान पेश होना है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित डीए बकाया का एक-चौथाई हिस्सा 31 मार्च तक चुकाया जाए। शेष 75 प्रतिशत बकाया राशि के भुगतान का तरीका और समय सीमा तय करने के लिए शीर्ष अदालत ने एक उच्च स्तरीय चार सदस्यीय समिति बनाने का आदेश दिया है। बता दें कि पिछले साल 16 मई को सुप्रीम कोर्ट ने तीन माह के भीतर यह भुगतान करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार ने फंड की कमी का हवाला देकर 6 माह का समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार मिल रही तारीखों पर कड़ा रुख दिखाकर अब अंतिम समय सीमा तय कर दी है। वहीं विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत कर कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की जीत बताया। उन्होंने कहा, ममता आज गलत साबित हुई हैं। सालों तक उन्होंने दावा किया कि डीए कोई अधिकार नहीं है, बल्कि एक दान है। लेकिन गुरुवार को शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया कि यह कर्मचारियों का हक है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों को उनके हक से वंचित करने के लिए नामी वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन अंततः न्याय की जीत हुई। दरअसल पश्चिम बंगाल में डीए को लेकर विवाद काफी गहरा है। वर्तमान स्थिति यह है कि 1 अप्रैल 2025 से बंगाल के कर्मचारियों का डीए मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय होता था। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले डीए और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच अब भी करीब 37 से 40 प्रतिशत का बड़ा अंतर बना हुआ है। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिलता है। बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए राज्य सरकार ने वर्तमान में केवल लेखानुदान पेश करने का निर्णय लिया है। पूर्ण बजट नई सरकार के गठन के बाद होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने ममता सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि 25 प्रतिशत बकाया चुकाने के लिए राज्य को हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा। आशीष दुबे / 05 फरवरी 2026