राष्ट्रीय
05-Feb-2026
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- ट्रेनों के पंक्चुअलिटी में आ रही गिरावट को लेकर लोकसभा में रिपोर्ट पेश नई दिल्ली,(ईएमएस)। ट्रेनों के पंक्चुअलिटी में गिरावट देखने को मिल रही है। इस पर संसद की लोक लेखा समिति ने ट्रेनों की पंक्चुअलिटी को लेकर चिंता जताई है। लोकसभा में पेश रिपोर्ट ‘ट्रेन ऑपरेशन में पंच्‍यूअलिटी और यात्रा समय’ ने रेलवे की पोल खोल दी। 2021-22 में 90.48 प्रतिशत पंक्चुअलिटी 2023-24 में घटकर 73.62 फीसदी रह गई। 2024-25 (अगस्त तक) में मामूली सुधार हुआ है, औसत 78.67 फीसदी हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक समिति ने लोकसभा में 10 साल के आंकड़े पेश किए। 2015-16 में 77.51 फीसदी से 2018-19 में 69.23 फीसदी तक कम हो गई। कोविड बाद 2021-22 में रिकवरी हुई, इसके बाद लगातार गिरावट आती गई है। इसमें श्रेणी ट्रेनें शामिल हैं, जिसमें मेल/एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, पैसेंजर, वंदे भारत भी शामिल हैं। समिति ने रेलवे बोर्ड को कड़े सुझाव दिए है। रिपोर्ट में आधुनिक कोचों की सराहना की गई, लेकिन 95 फीसदी यात्री नियमित ट्रेनों पर निर्भर है। पीएसी ने कहा कि समयबद्धता सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि रेलवे की विश्वसनीयता का भी प्रश्न है। रेलवे को पंच्‍यूलिटी में सुधार करे, यात्रियों को लेट ट्रेनों से छुटकारा मिलेगा। रेलवे के मुताबिक गंतव्य पर 15 मिनट देरी होने पर भी समय पर मानी जाती है। बीच के स्टेशनों की देरी को अनदेखा किया जाता है यानी इसे देरी नहीं मानी जाती है। पीएसी ने इसे भ्रामक बताया। जापान में शुरुआती स्टेशन, मध्य स्टेशन, अंतिम स्टेशन तीनों पर सेकेंड में ट्रेन की पंच्‍युअलिटी मापी जाती है। इतना ही नहीं वहां जल्दी पहुंचना भी ठीक नहीं माना जाता है। भारतीय रेलवे 2016-17 का वादा किया गया था कि मेल/एक्सप्रेस 75 किमी/घंटा, मालगाड़ी 50 किमी/घंटा पर हकीकत में यात्री ट्रेन 50.6 किमी/घंटा, मालगाड़ी 23.6 किमी/घंटा चलती हैं। इसका कारण जोनल रेलवे के बीच कोआर्डीनेशन और ट्रैक क्षमता, सिग्नल सिस्टम की कमी है। पीएसी ने सिफारिशों में कहा कि बीच स्टेशनों पर पंच्‍यूअलिटी मॉनिटरिंग शुरू करें। 15 मिनट बफर को कम करें। औसत गति बढ़ाने के लिए बड़ी योजना बनाएं। सिराज/ईएमएस 05फरवरी26