क्षेत्रीय
05-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने मेडिकल छात्र के एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर या माइग्रेशन पर पूर्ण प्रतिबंध को अमान्य करार दिया है। साथ ही नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को आवश्यक शर्तों के साथ माइग्रेशन की अनुमति देने हेतु उचित नीति बनाने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन, 2023 का रेगुलेशन 18 स्पष्ट रूप से अविवेकपूर्ण और मनमाना होने के कारण संविधान के खिलाफ है। पीठ ने यह फैसला 40 प्रतिशत दृष्टिबाधित एक मेडिकल छात्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर से दिल्ली के एक कॉलेज में माइग्रेशन की मांग की थी। राहत देते हुए अदालत ने एनएमसी को याचिकाकर्ता के ट्रांसफर आवेदन पर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत ने चार फरवरी को दिए अपने निर्णय में कहा कि मेडिकल शिक्षा संस्थानों में एकरूपता, मानक और अखंडता बनाए रखने के नाम पर ट्रांसफर या माइग्रेशन पर पूर्ण प्रतिबंध, जिसकी आवश्यकता विभिन्न परिस्थितियों में पड़ सकती है, उचित नहीं कहा जा सकता। अदालत की राय में ऐसा प्रतिबंध स्पष्ट रूप से अविवेकपूर्ण और मनमाना है। अदालत ने यह भी कहा कि माइग्रेशन के दुरुपयोग की आशंका का एनएमसी का तर्क टिकाऊ नहीं है, क्योंकि दुरुपयोग की संभावना के आधार पर किसी नागरिक के वैध अधिकारों से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने नोट किया कि बाड़मेर की कठोर जलवायु के कारण याचिकाकर्ता की चिकित्सीय स्थिति और क्षमताएं प्रभावित हो रही थीं। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (PwD Act) के तहत सार्वजनिक निकायों का दायित्व है कि दिव्यांग व्यक्तियों को उचित सुविधा और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/05/ फरवरी/2026