खेल
06-Feb-2026
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रांची (ईएमएस)। जहां अधिकतर क्रिकेटर संन्यास के बाद कमेंट्री का पेश अपनाते हैं। वहीं भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेनद्र सिंह धोनी इससे दूरी बनाये रखते हैं। सबसे सफल कप्तानों में शामिल रहें धोनी का कहना है कि वह कमेंटरी इसलिए नहीं करते क्योंकि वह अपने को इसके योग्य नहीं मानते हैं। धोनी का कहना है कि उन्हें आंकड़े याद नहीं रहते इसलिए वह अच्छी कमेंट्री नहीं कर सकते। धोनी का कहना है कि इसलिए उनके भविष्य में भी कमेंटेटर की भूमिका में आने की संभावनाएं नहीं हैं। धोनी के अनुसार आंकड़ों को भूल जाते हैं और ये उनकी कमजोरी है और इसलिए इस भूमिका में नहीं उतरते हैं जो संन्यास लेने के बाद खिलाड़ियों का सबसे प्रिय काम रहा है। धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने तीन ट्रॉफी जीती हैं लेकिन 2020 में संन्यास लेने के बाद से ही उन्होंने कभी कमेंट्री नहीं की है। वह केवल आईपीएल में ही खेलते हैा। धोनी ने कहा, ‘‘कमेंट्री करना मेरे लिए बेहद कठिन है। मुझे लगता है कि खेल का आंखों देखा हाल सुनाने और उस प्रक्रिया में खिलाड़ियों की आलोचना करने के बीच बहुत मामूली अंतर होता है यह अंतर बहुत ही नाजुक होता है। उन्होंने कहा, ‘‘अक्सर, आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि आप जो कर रहे हैं वह शायद थोड़ा गलत है और आप हमेशा उस स्थिति में रहना चाहेंगे जहां आप खेल का वर्णन कर रहे हों अगर आपको लगता है कि कुछ गलत है तो आप उसे खुलकर बोल देते हैं। धोनी ने कहा, इसे पेश करना भी एक कला है अपनी बात शालीनता से कैसे कही जाए ताकि किसी को खराब न लगे। अगर टीम हार रही है तो उसके कुछ कारण होंगे और आपको उन कारणों को इस तरह से बताने का कौशल होना चाहिए कि किसी को बुरा न लगे यही कमेंट्री की कला है। इसके अलावा धोनी को लगता है कि वह आंकड़ों को याद नहीं कर पाते हैं जिस कारण वह इस काम के लिए खुद को फिट नहीं मानते हैं यहां तक कि उन्हें अपने आंकड़े भी याद नहीं रहते हैं. धोनी ने कहा,‘‘मैं आंकड़ों के मामले में अच्छा नहीं हूं लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जो आंकड़ों के मामले में बहुत अच्छे हैं. वे आंकड़े जानते हैं अगर आप मुझसे मेरे आंकड़ों के बारे में पूछेंगे, तो मैं जवाब नहीं दे पाउंगा। धोनी ने कहा, ‘‘मैं एक अच्छा श्रोता हूं और मैं उन लोगों से बात करता हूं जिनके साथ मैं सहज महसूस करता हूं पर मैं बोलने से ज्यादा सुनने वाला व्यक्ति हूं। अगर मुझे किसी विषय के बारे में जानकारी नहीं है तो मैं ज्यादा नहीं बोलता क्योंकि सुनने से मुझे ज्यादा सीखने को मिलता है। धोनी ने मुस्कराते हुए स्वीकार किया कि फोन पर जवाब देने में वह अब भी खुद को कमजोर मानते हैं। उन्होंने कहा, मैं उस तरह से संवाद करने में अच्छा नहीं हूं मुझे आमने-सामने बैठकर लोगों से बात करना पसंद है। मैं फोन पर बात करने में खुद को सहज नहीं पाता हूं। गिरजा/ईएमएस 06 फरवरी 2026