- एक्टर मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूते से रगड़ा भोपाल (ईएमएस)। नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक दिन पहले हुए विरोध के बाद आज फिर भोपाल में ब्राह्मण समाज ने प्रदर्शन किया। एमपी नगर में हुए प्रदर्शन के दौरान फिल्म के टाइटल, डायलॉग, निर्देशन और कलाकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। संगठन ने कहा कि वह किसी भी तरह की सफाई स्वीकार नहीं करेगा और फिल्म को रिलीज नहीं होने देगा। प्रदर्शन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि फिल्मों को समाज का दर्पण कहा जाता है, लेकिन इस फिल्म के जरिए एक पूरे समाज को अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओटीटी जैसे बड़े प्लेटफॉर्म ने बिना जिम्मेदारी के इस तरह का कंटेंट लॉन्च किया है और अब इसे किसी भी हाल में चलने नहीं दिया जाएगा। पुष्पेंद्र मिश्रा ने मंच से सरकार और व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एफआईआर की मांग के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर सोए हुए हैं। साथ ही यूजीसी नियमों और सवर्ण समाज से जुड़े संदर्भों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की नीतियां समाज को बांटने का काम कर रही हैं। प्रदर्शन के दौरान फिल्म से जुड़े कलाकारों के खिलाफ नारे लगाए गए। वहीं अभिनेता मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूते से रगडक़र प्रतीकात्मक विरोध किया गया, जिससे मौके पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। डायरेक्टर ने फिल्म को बताया काल्पनिक इधर, बढ़ते विरोध के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर और डॉयरेक्टर नीरज पांडे ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए फिल्म को पूरी तरह काल्पनिक बताया है। नीरज पांडे ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में कहा कि यह एक फिक्शनल पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल किसी जाति या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि एक काल्पनिक किरदार के उपनाम के तौर पर किया गया है। उन्होंने कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी भी समाज, धर्म या वर्ग को ठेस पहुंचाना नहीं है। नीरज पांडे ने यह भी कहा कि फिल्म के टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, जिनका वे सम्मान करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए फिल्म का टीजर और सभी प्रमोशनल कंटेंट नेटफ्लिक्स इंडिया के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूट्यूब से हटा दिया गया है। यूपी में मुख्यमंत्री ने दिए एफआईआर के निर्देश विवाद ने कानूनी रूप भी ले लिया है। लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुख्यमंत्री के निर्देश पर फिल्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत खुद हजरतगंज कोतवाली के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की ओर से दर्ज कराई गई है। पुलिस के अनुसार फिल्म का नाम और कहानी एक विशेष जाति और समुदाय, खासकर ब्राह्मण समाज को गलत तरीके से दर्शाती है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगडऩे की आशंका है। दिल्ली हाईकोर्ट में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग इसके अलावा मुंबई के समता नगर थाने में भी फिल्म के टाइटल को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी कर मामले पर संज्ञान लिया है। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें ‘पंडत’ के नाम से जाना जाता है। इसी नाम और कुछ संवादों को लेकर ब्राह्मण समाज और धार्मिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। विनोद / 06 फरवरी 26