राज्य
06-Feb-2026


ईओडब्ल्यू ने शुक्रवार को सीएमएचओ डॉ मनीष शर्मा को नोटिस जारी कर उपस्थित होने के दिए थे निर्देश भोपाल(ईएमएस)। राजधानी भोपाल में लंबे समय से संचालित हो रहे फर्जी एवं अवैध अस्पतालों के खिलाफ की गई शिकायतों के बाद अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रारंभ कर दी है। शुक्रवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), भोपाल की चार सदस्यीय टीम मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (CMHO) कार्यालय भोपाल पहुंची और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की। फर्जी अस्पतालों की शिकायतें लगातार सीएमएचओ कार्यालय भोपाल को की जा रही थीं, किंतु शिकायतों के बावजूद सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा एवं उनके कार्यालय द्वारा किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इस लापरवाही एवं संभावित मिलीभगत को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) एवं पुलिस विभाग को औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। शिकायतों के आधार पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की। इसी क्रम में ईओडब्ल्यू भोपाल के निरीक्षक/जांचकर्ता योगेंद्र दुबे द्वारा सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा को दिनांक 06 फरवरी 2026 को कार्यालयीन समय में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने हेतु पत्र जारी किया गया था। जानकारी के अनुसार सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा निर्धारित तिथि को ईओडब्ल्यू कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए, जिसके पश्चात आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की चार सदस्यीय टीम स्वयं सीएमएचओ कार्यालय भोपाल पहुंची और संबंधित अभिलेखों व दस्तावेजों की जांच की। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि “राजधानी भोपाल में लगातार फर्जी और अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा एवं उनके कार्यालय के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से मरीजों की जान के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न करना यह साबित करता है कि पूरा तंत्र संरक्षण देने में लगा हुआ है।” परमार ने कहा कि “सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा पर पहले से ही लोकायुक्त में प्रकरण पंजीबद्ध है। इसके बावजूद उन्हें राजधानी भोपाल जैसे संवेदनशील जिले की जिम्मेदारी सौंपना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सीधे-सीधे नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।” एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मांग की कि फर्जी अस्पतालों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए, दोषियों को निलंबित किया जाए तथा राजधानी में संचालित सभी निजी अस्पतालों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन प्रदेश-व्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा। हरि प्रसाद पाल / 06 फरवरी, 2026