टोक्यो (ईएमएस)। प्लास्टिक बैग की समस्या से निपटने जापान ने बेहद उपयोगी समाधान पेश किया है। जापान में ऐसे किराने के बैग लॉन्च किए गए हैं, जो पूरी तरह आलू के स्टार्च से बनाए गए हैं। दिखने और उपयोग में बिल्कुल प्लास्टिक जैसे मजबूत इन बैगों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पारंपरिक प्लास्टिक की तरह वर्षों तक कचरे के ढेर में पड़े नहीं रहते, बल्कि पानी के संपर्क में आते ही सहज रूप से घुल जाते हैं। सदियों तक समुद्र में तैरते रहने वाले प्लास्टिक बैग अक्सर कछुओं, मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के लिए घातक साबित होते हैं, क्योंकि वे इन्हें भोजन समझकर निगल लेते हैं। जापान में विकसित यह नई सामग्री इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है। खास बात यह है कि यह स्टार्च-आधारित बैग ठंडे पानी में भी पूरी तरह टूट जाता है। यदि कोई समुद्री जीव इन्हें गलती से निगल ले, तो यह उसके शरीर में बिना किसी नुकसान के प्राकृतिक रूप से घुल जाएगा। बैग के घुलने के बाद पानी में न तो कोई जहरीला रसायन बचता है और न ही माइक्रोप्लास्टिक। यह नवाचार दिखाता है कि किस तरह तकनीक और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर पर्यावरण–अनुकूल समाधान विकसित किए जा सकते हैं। आलू के स्टार्च से बना यह बैग न सिर्फ मजबूत है और वजन उठाने में सक्षम है, बल्कि उपयोग के बाद इसे नष्ट करना भी बेहद आसान है। इससे प्लास्टिक कचरे का बोझ कम हो सकता है और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जापान का यह कदम अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। यह मॉडल दर्शाता है कि यदि रोजमर्रा की वस्तुओं के उत्पादन में पर्यावरण–सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, तो धरती को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। सुदामा/ईएमएस 07 फरवरी 2026