ज़रा हटके
07-Feb-2026
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उडुपी (ईएमएस)। कहते हैं कि जब ऊपर वाला देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है। यह पुरानी कहावत कर्नाटक के उडुपी जिले के रहने वाले 33 वर्षीय शांतनु शेट्टीगर के लिए पूरी तरह सच साबित हुई है। अपनी मेहनत और ईमानदारी से खाड़ी देश में आजीविका कमा रहे शांतनु की किस्मत ने ऐसी करवट ली कि वे रातों-रात अरबपति बन गए। अबू धाबी के मशहूर बिग टिकट ड्रॉ ने उनके जीवन को एक नई दिशा दे दी है, जहाँ उन्होंने 2 करोड़ दिरहम यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 49 करोड़ रुपये का बंपर इनाम जीता है। शांतनु शेट्टीगर मूल रूप से कर्नाटक के तटीय शहर उडुपी के उदयावर के रहने वाले हैं। वे पिछले कुछ वर्षों से ओमान की राजधानी मस्कट में रह रहे हैं और वहां रिटेल सेक्टर (खुदरा क्षेत्र) में कार्यरत हैं। आम प्रवासियों की तरह ही शांतनु भी अपने परिवार के बेहतर भविष्य का सपना संजोए विदेश में कड़ी मेहनत कर रहे थे। लेकिन मंगलवार को जब बिग टिकट के नतीजे ऑनलाइन घोषित हुए, तो विजेता के रूप में उनके नाम ने सबको चौंका दिया। इस जीत की सबसे दिलचस्प और दिल को छू लेने वाली बात यह है कि शांतनु ने यह लॉटरी का टिकट अकेले नहीं खरीदा था। उन्होंने अपने एक करीबी दोस्त के साथ मिलकर इस टिकट में निवेश किया था। जब आयोजकों ने आधिकारिक रूप से शांतनु के नाम की घोषणा की, तो एक पल के लिए उन्हें खुद अपनी कानों पर यकीन नहीं हुआ। जीत की खबर मिलने के बाद, शांतनु ने अपनी ईमानदारी का परिचय देते हुए स्पष्ट किया कि वे इस विशाल इनामी राशि को अपने उस दोस्त के साथ आधा-आधा साझा करेंगे, जिसने टिकट खरीदने में उनका साथ दिया था। यह जीत अब न केवल शांतनु की किस्मत, बल्कि उनकी गहरी दोस्ती की भी मिसाल बन गई है। जैसे ही शांतनु की इस ऐतिहासिक कामयाबी की खबर सात समंदर पार उनके गृहनगर उदयावर पहुँची, वहां उत्सव जैसा माहौल बन गया। रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई और मिठाइयां बांटी जाने लगीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शांतनु हमेशा से ही एक सरल स्वभाव के व्यक्ति रहे हैं और विदेश में रहने के बावजूद वे अपने गांव और लोगों से हमेशा जुड़े रहे। शाम होते-होते उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। 49 करोड़ रुपये की यह विशाल राशि किसी भी व्यक्ति के जीवन और आने वाली पीढ़ियों को संवारने के लिए पर्याप्त है। फिलहाल, शांतनु मस्कट में ही हैं और पुरस्कार की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। एक साधारण प्रवासी से करोड़पति तक का उनका यह सफर उन हजारों लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है जो सुनहरे भविष्य की तलाश में अपने देश से दूर मेहनत कर रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 07 फरवरी 2026