ज़रा हटके
08-Feb-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। वैज्ञानिकों के लिए सूर्य पर बना एक विशाल और तेजी से सक्रिय होता सनस्पॉट नई चिंता का विषय बन गया है। हाल के दिनों में रीजन 4366 नाम का यह सनस्पॉट कई शक्तिशाली सौर ज्वालाएं छोड़ चुका है। अमेरिकी एजेंसी एनओएए के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर के अनुसार 5 फरवरी को धरती पर भू-चुंबकीय गतिविधि बढ़ने की संभावना है। इसके चलते सामान्य से कम अक्षांशों पर भी नॉर्दर्न लाइट्स यानी ऑरोरा देखने का मौका मिल सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक रीजन 4366 अचानक उभरकर बेहद तेज गति से फैल रहा है। इसका आकार 1859 के ऐतिहासिक कैरिंगटन इवेंट वाले सनस्पॉट के लगभग आधे तक पहुंच गया है, जिसने अब तक का सबसे विनाशकारी भू-चुंबकीय तूफान पैदा किया था। इस तेज विस्तार ने इसे अत्यंत अस्थिर बना दिया है। सिर्फ 24 घंटों के भीतर इस क्षेत्र से 20 से अधिक सौर ज्वालाएं निकलीं, जिनमें 23 एम-क्लास और 4 एक्स-क्लास फ्लेयर्स दर्ज की गईं। एक्स-क्लास फ्लेयर्स सूर्य पर होने वाली सबसे शक्तिशाली ऊर्जा विस्फोट की श्रेणी में आते हैं। हालात तब और गंभीर हुए जब रविवार सुबह 6 बजकर 57 मिनट पर इस सनस्पॉट ने एक्स8.1 श्रेणी की जबरदस्त सौर ज्वाला छोड़ी। यह अक्टूबर 2024 में दर्ज एक्स9.0 विस्फोट के बाद पिछले दो वर्षों की सबसे शक्तिशाली सौर ज्वाला रही। इस घटना के तुरंत बाद दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में आंशिक रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। इसके साथ ही सूर्य से प्लाज्मा का विशाल बादल धरती की दिशा में निकला, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) के नाम से जाना जाता है। वैज्ञानिक बताते हैं कि सनस्पॉट सूर्य की सतह पर वे क्षेत्र होते हैं जहां चुंबकीय ऊर्जा अत्यधिक अस्थिर रहती है। चुंबकीय रेखाओं के उलझने और टूटने से ही सौर ज्वालाएं तथा सीएमई उत्पन्न होते हैं। नासा पहले ही पुष्टि कर चुका है कि सूर्य 2024 से अपने उच्च सक्रिय चरण ‘सोलर मैक्सिमम’ में प्रवेश कर चुका है और यह स्थिति 2026 तक जारी रह सकती है। इस दौरान न केवल शानदार ऑरोरा दिखाई दे सकते हैं, बल्कि रेडियो संचार बाधित होने, जीपीएस में गड़बड़ी और सैटेलाइट्स को नुकसान जैसी समस्याओं की भी आशंका बढ़ जाती है। नवंबर 2025 में दर्ज एक्स5.1 ज्वाला अब तक सबसे शक्तिशाली मानी जाती थी, लेकिन सनस्पॉट 4366 उससे आगे निकल चुका है। स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर का अनुमान है कि यह सीएमई 5 फरवरी को धरती को सीधे तौर पर नहीं टकराएगा, लेकिन हल्की टक्कर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा होता है, तो सूर्य से आए चार्ज्ड कण पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों की ओर बढ़ेंगे और इससे शानदार, चमकीले और रंगीन ऑरोरा दिखाई दे सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 08 फरवरी 2026