ज़रा हटके
08-Feb-2026
...


वॉशिंगटन (ईएमएस)। हर उम्र के लोगों में आजकल जंक फूड को लेकर दीवानगी देखी जा रही है। जंक फूड खाने में स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। जंक फूड खाना आजकल फैशन बन गया है। अधिकतर लोगों को घर का बना खाना पसंद नहीं आ रहा है और वे जमकर जंक फूड का सेवन कर रहे हैं। बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, पैकेट वाले स्नैक्स और शुगरी ड्रिंक्स देखते ही लोग खिंचे चले जाते हैं। डॉक्टर्स की मानें तो कभी-कभार स्वाद के लिए जंक फूड खा सकते हैं, लेकिन रोज इनका सेवन करना बेहद खतरनाक होता है। जंक फूड में पोषण कम और कैलोरी, नमक, शुगर व ट्रांस फैट बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। इससे कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। लंबे समय तक जंक फूड खाना जानलेवा भी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जंक फूड हाई कैलोरी और लो फाइबर होता है, जिससे पेट जल्दी नहीं भरता और बार-बार भूख लगती है। इससे वजन तेजी से बढ़ता है और पेट, कमर व जांघों पर चर्बी जमा होने लगती है। मोटापा सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि डायबिटीज, हार्ट डिजीज और जोड़ों के दर्द जैसी कई बीमारियों की जड़ है। बच्चों और युवाओं में जंक फूड मोटापे की सबसे बड़ी वजह है। इससे बच्चे कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जंक फूड खाने से दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इसमें मौजूद ट्रांस फैट और ज्यादा नमक शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है और गुड कोलेस्ट्रॉल कम करता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट ब्लॉकेज और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है। एक्सपर्ट की मानें तो लगातार जंक फूड लेने से फैटी लिवर डिजीज का खतरा भी बढ़ जाता है, जो आगे चलकर लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। मेंटल हेल्थ भी जंक फूड से अछूती नहीं रहती है। ज्यादा प्रोसेस्ड और शुगर वाला खाना डिप्रेशन, एंजायटी और मूड स्विंग्स को बढ़ा सकता है। जंक फूड दिमाग में सेरोटोनिन जैसे फील गुड हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और फोकस की कमी महसूस होती है। बच्चों में इसका असर पढ़ाई और व्यवहार पर भी साफ दिखाई देता है। लंबे समय तक जंक फूड खाने वालों में कम उम्र में ही दिल की बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है। पाचन तंत्र पर भी जंक फूड का असर बेहद खतरनाक होता है। फाइबर की कमी और तले-भुने भोजन के कारण गैस, एसिडिटी, कब्ज, पेट दर्द और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। सुदामा/ईएमएस 08 फरवरी 2026