नई दिल्ली (ईएमएस)। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान, दोनों ही सुबह खाली पेट थोड़ी मात्रा में घी के सेवन को लाभकारी बताते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि घी पाचन को दुरुस्त करता है और शरीर को पूरे दिन हल्का और ऊर्जावान महसूस कराता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, घी में ब्यूटिरिक एसिड की भरपूर मात्रा होती है, जो आंतों की अंदरूनी परत यानी गट लाइनिंग को मजबूत करता है। इससे आंतों में सूजन कम होती है और लीकी गट जैसे विकारों का खतरा घटता है। खाली पेट घी का सेवन पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है। इसके परिणामस्वरूप भोजन आसानी से पचता है और गैस, एसिडिटी एवं ब्लोटिंग जैसी आम समस्याओं में राहत मिलती है। यही कारण है कि कई डॉक्टर और आयुर्वेद विशेषज्ञ सुबह की दिनचर्या में इसका सेवन करने की सलाह देते हैं। कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए भी घी किसी प्राकृतिक उपचार से कम नहीं माना जाता। यह एक नैचुरल लुब्रिकेंट की तरह काम करते हुए आंतों की मूवमेंट को आसान बनाता है, जिससे पेट सुबह आसानी से साफ हो जाता है। गैस्ट्रो विशेषज्ञों के अनुसार, घी गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे माइक्रोबायोम का संतुलन बेहतर होता है। इसके अलावा यह विटामिन ए, डी, ई और के जैसे महत्वपूर्ण फैट-सॉल्युबल विटामिन्स के अवशोषण में भी मदद करता है। इस तरह घी पोषण और पाचन दोनों के लिए दोहरी भूमिका निभाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह खाली पेट लगभग एक चम्मच देसी घी का सेवन पर्याप्त होता है। इसे गुनगुने पानी या दूध के साथ लिया जा सकता है। हालांकि, जिन लोगों को फैटी लिवर, हाई कोलेस्ट्रॉल या गॉल ब्लैडर से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें घी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही मात्रा में लिया गया घी न केवल पाचन तंत्र को मजबूत करता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित होता है। मालूम हो कि घी भारतीय खान-पान का एक ऐसा हिस्सा है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी खास सुगंध और स्वाद किसी भी साधारण भोजन को खास बना देता है। सुदामा/ईएमएस 08 फरवरी 2026