ज़रा हटके
08-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आजकल की व्यस्त दिनचर्या में नियमित योगाभ्यास बेहद फायदेमंद साबित होता है, विशेषकर उत्तानमंडूकासन, जिसे पीठ और गर्दन दर्द से राहत देने वाला प्रभावी आसन माना जाता है। योग केवल कुछ मुद्राओं का अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो शरीर और मन दोनों में संतुलन बनाने में सहायक होता है। यदि दिनचर्या में थोड़ी अनुशासन के साथ योग को शामिल किया जाए, तो इसके सकारात्मक परिणाम जल्दी महसूस होने लगते हैं। उत्तानमंडूकासन खास तौर पर रीढ़ की हड्डी को अच्छा खिंचाव देता है और पीठ के ऊपरी हिस्से में जमा तनाव को कम करने में मदद करता है। लगातार कंप्यूटर पर झुककर काम करने वाले लोगों में ग्रीवा यानी गर्दन के दर्द की समस्या बढ़ती जा रही है। इस आसन का नियमित अभ्यास ग्रीवा संबंधी परेशानियों को कम कर सकता है और गर्दन को लचीला बनाता है। कंधों के आसपास जमी अकड़न भी इस आसन से धीरे-धीरे खुलने लगती है, जिससे कंधे हल्के और आरामदायक महसूस होते हैं। इस आसन से छाती का प्राकृतिक विस्तार होता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेना सहज हो जाता है। जब श्वास सुचारू और गहरी होती है, तो शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और थकान कम महसूस होती है। तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए यह आसन मानसिक शांति भी प्रदान करता है, क्योंकि श्वास-प्रश्वास की प्रक्रिया में सुधार मन को स्थिर और शांत बनाता है। उत्तानमंडूकासन केवल मांसपेशीय तनाव ही नहीं कम करता, बल्कि पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक असर डालता है। इस आसन के दौरान पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन क्रिया सक्रिय होती है। गैस, अपच और धीमी पाचन जैसी समस्याओं में यह आसन राहत पहुंचा सकता है। नियमित रूप से इसका अभ्यास शरीर में नई ऊर्जा और ताजगी लाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थोड़ा समय निकालकर उत्तानमंडूकासन जैसे सरल लेकिन प्रभावी आसनों को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से शरीर, मन और स्वास्थ्य तीनों को लाभ मिलता है। बता दें कि लंबी अवधि तक मोबाइल या लैपटॉप पर काम करना, गलत पॉश्चर में बैठना और तनाव से भरी दिनचर्या शरीर को धीरे-धीरे थका देती है। इसका असर सबसे ज्यादा गर्दन, कंधों और पीठ पर पड़ता है, जहाँ दर्द, खिंचाव और जकड़न की समस्या बढ़ने लगती है। सुदामा/ईएमएस 08 फरवरी 2026