भागलपुर, (ईएमएस)। एक उर्दू निदेशालय मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग एवं जिला पदाधिकारी, भागलपुर के निदेशानुसार एक दिवसीय कार्यशाला, सेमिनार एवं मुशायरा कार्यक्रम का आयोजन जिला के टाउन हॉल में किया गया। उक्त कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. नवल किशोर चौधरी जिला पदाधिकारी भागलपुर, उप विकास आयुक्त भागलपुर, दिनेश राम अपरसमाहर्ता भागलपुर, नागेंद्र कुमार गुप्ता संयुक्त निदेशक-सह-जिला जनसंपर्क पदाधिकारी भागलपुर, जिला शिक्षा पदाधिकारी भागलपुर, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी (शिक्षा) भागलपुर, सुभाषिनी प्रसाद स्थापना उपसमाहर्ता सह प्रभारी पदाधिकारी जिला उर्दू भाषा कोषांग भागलपुर एवं शबाना दाऊद बिहार उर्दू परामर्श समिति सदस्य बिहार सरकार, के संयुक्त कर कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभिक संबोधन प्रभारी पदाधिकारी के द्वारा किया गया उसके उपरांत अपने वक्तव्य में उर्दू भाषा को पूर्णतः भारतीय भाषा करार देते हुए उसकी उन्नति की बात कही और ऐसे आयोजनों को प्रखंड स्तर पर भी आयोजित करने की मंशा जाहिर की। उप विकास आयुक्त ने कहा कि उर्दू एक ऐसी मधुर एवं मनमोहक भाषा है जो किसी के भी दिल को लुभा सकती है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि इस तरह का आयोजन प्रतिदिन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में ऐसी कोई गीत नहीं है जिसमें उर्दू लफ्जों का प्रयोग शामिल न हो, क्योंकि उर्दू लफ्जों के बिना तुकबंदी नहीं बनती है। उन्होंने कहा कि उर्दू स्थापित भाषा है और राज्य सरकार ने द्वितीय भाषा के रूप में इसे घोषित किया है। जिलाधिकारी के आवास के बाहर के नेम प्लेट में भी उर्दू भाषा में एक प्लेट लगा हुआ है और एक हिंदी में लिखा हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उर्दू लफ़्ज़ों का प्रयोग धीरे-धीरे कम कर दिया गया है हालांकि बुजुर्गों द्वारा इसका प्रयोग ज्यादा किया जाता है संगीत की दुनिया अधूरी होगी अगर उर्दू का प्रयोग ना हो। उर्दू कर्णप्रिय भाषा है। उन्होंने कहा कि बचपन में उन्होंने भी उर्दू भाषा सीखने का प्रयास किया था लेकिन बाद के दिनों में विज्ञान की पढ़ाई में इतने मशगुल हो गए कि फिर उर्दू पीछे छूट गई। उन्होंने कहा कि इस तरह के छोटे-छोटे मुशायरा प्रखंड स्तर पर भी आयोजित होने चाहिए ताकि इस भाषा को प्रोत्साहित किया जा सके। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक नागेंद्र कुमार गुप्ता ने मुनव्वर राणा और निदा फाजली के कई मशहूर शेर पढ़ कर सुनाएं जिसमें * अपना गम लेकर कहीं और न जाया जाए, घर में बिखरी हुई चीजों को सजाया जाए, घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर लें किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए। * कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कहीं जमीं तो कहीं आसमान नहीं मिलता। कार्यक्रम के प्रथम भाग सेमिनार में आलेख पाठक के रूप में डॉक्टर अरशद राजा मोहम्मद शहाबुद्दीन मारवाड़ी कॉलेज मोहम्मद शहाबुद्दीन सबौर कॉलेज भागलपुर तथा डेलिगेट्स के रूप में डॉक्टर शाहिद रजा जमाल डॉक्टर इकबाल हसन आजाद डॉक्टर अनवर हुसैन की सहभागिता रही। फुरकान खान (प्रशिक्षक) ने अपने विशेष अभिभाषण में सभी शिक्षकों को शिक्षा एवं कुशल अध्यापक के गुरु सिखाए एवं सभी शिक्षकों को बुनियादी स्तर पर ज्यादा ध्यान आकर्षित करने हेतु बल दिया । कार्यक्रम के द्वितीय चरण में शायर के रूप में फरहत हुसैन खुश्दिल, काजिम अशरफी, मोहम्मद अरशद परवेज़, मासूम रजा आदिल, अज़ीकुररहमान, शहरोज अख्तर, हारून रशीद, मंजर इमाम शफ़क़, फैज रहमान, मोहम्मद जौसर अली अयाग, अनवर हुसैन इरज़, कलीम आज़र, उबेद अनवर, मोहम्मद तबरेज अख्तर ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का मंच संचालन मो.सादिक के द्वारा किया गया तथा उक्त अवसर पर उर्दू अनुवादक मो.अरशद मुश्ताक, मेहरुन्निसा उर्दू अनुवादक एवं भागलपुर अंतर्गत समस्त उर्दू कर्मी उपस्थित रहे। संतोष झा- ०८ फरवरी/२०२६/ईएमएस