जयपुर (ईएमएस)। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। प्रदेश में संचालित स्वास्थ्य की योजनाओं ने आमजन को स्वास्थ्य का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज के तहत मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (मा) योजना के माध्यम से प्रदेशवासियों को 25 लाख रुपये तक के सालाना कैशलैस इलाज की सुविधा दी जा रही है। नि:शुल्क जांच नि:शुल्क दवाइयां नि:शुल्क ओपीडी, नि:शुल्क आईपीडी, नि:शुल्क आपातकालीन सेवाएं, नि:शुल्क हीमोडायलिसिस सुविधा, नि:शुल्क मा वाउचर, नि:शुल्क एम्बुलेन्स जैसी विभिन्न योजनाओं ने आमजन को इलाज के खर्चे से राहत दी है। योजनाओं के जरिये जरूरतमंदों को बुखार के इलाज से लेकर रोबोटिक सर्जरी तक की नि:शुल्क सुविधाएं दी जा रही हैं। सिंह ने बताया कि मा योजना के तहत प्रदेश के 1.36 करोड़ पात्र परिवारों को 25 लाख रुपये तक का हैल्थ कवरेज मिल रहा है। वर्तमान सरकार के कार्यकल में लगभग 7 हजार 826 करोड़ लोगों को लाभान्वित किया गया है। योजना में विभिन्न बीमारियों से संबंधित 2 हजार 179 उपचार पैकेज जोड़े गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संवेदनशील पहल करते हुए वर्ष 2026-27 के बजट में असहाय, लावारिस तथा मानसिक विमंदितों का बिना दस्तावेजों के भी नि:शुल्क इलाज किये जाने की घोषणा की गई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्री हरिमोहन शर्मा द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार द्वारा चुनावों से ठीक पहले आनन फानन में बिना किसी तैयारी के स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम लागू किया गया। अधिनियम को व्यवहारिक रूप से लागू करने के लिए किसी प्रकार के नियम नहीं बनाए गए और न ही संबंधित हितधारकों तथा अस्पतालों से चर्चा की गई। इसके अलावा भारतीय चिकित्सा संघ, निजी अस्पताल संघ, नर्सिंग होम सोसाइटी आदि से किये गए समझौतों को भी अधिनियम में शामिल नहीं किया। उन्होंने जानकारी दी कि अधिनियम के नियमों के संबंध में एक चिकित्सक द्वारा उच्च न्यायालय, जयपुर में पीआईएल दाखिल की गई है तथा उच्च न्यायालय का निर्णय प्रतीक्षित है। अशोक शर्मा/ 6 बजे/ 12 फरवरी 2026