लेखिका तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश को लेकर चिंता जाहिर की नई दिल्ली (ईएमएस)। बांग्लादेश में गुरुवार को 299 सीटों पर आम चुनाव हो रहा है, और इस बीच प्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन ने राजनीतिक स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर धर्मनिरपेक्ष दलों पर प्रतिबंध जारी रहा, तब कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी मुख्य विपक्षी दल बनकर उभर सकता है। तसलीमा नसरीन ने एक्स पर बांग्लादेश के भविष्य को लेकर सवाल उठाकर कहा कि जमात-ए-इस्लामी के मुख्य विपक्षी दल बनने से लोकतंत्र और मानवाधिकारों को बड़ा झटका लगेगा। उन्होंने लिखा कि अगर बीएनपी चुनाव जीतती है, तब पहली बार जमात-ए-इस्लामी मुख्य विपक्षी दल बन जाएगी, और यह केवल इसलिए संभव होगा क्योंकि प्रमुख धर्मनिरपेक्ष दल अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया गया है। लेखिका ने वंशवादी और धर्म आधारित राजनीति का विरोध करते हुए कहा कि सच्चे धर्मनिरपेक्ष राज्य में कोई राजनीतिक दल धर्म पर आधारित नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि अगर किसी दल पर प्रतिबंध लगाना ही आवश्यक है, तो वह जमात-ए-इस्लामी होना चाहिए, न कि धर्मनिरपेक्ष दलों पर। मशहूर लेखिका तसलीमा ने जोर दिया कि बांग्लादेश को वंशवादियों या धर्मगुरुओं की जरूरत नहीं है। देश को ऐसे नेताओं की आवश्यकता है, जो महिलाओं के अधिकार, मानवाधिकार, सार्वभौमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि चुनी हुई सरकार अवामी लीग पर से प्रतिबंध हटा देगी, ताकि विपक्ष धर्मनिरपेक्ष या वामपंथी दलों से आए, न कि किसी धार्मिक दल से। तसलीमा नसरीन का संदेश है कि लोकतंत्र और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व को प्रोत्साहित करना जरूरी है और कट्टरपंथी दलों को राजनीतिक लाभ नहीं मिलना चाहिए। उनका मानना है कि बांग्लादेश का भविष्य महिलाओं और नागरिकों के अधिकारों पर आधारित, समावेशी और धर्मनिरपेक्ष शासन में है। आशीष दुबे / 12 फरवरी 2026