नई दिल्ली,(ईएमएस)। बीते पाँच दशकों से अधिक समय तक देश के नीतिगत और रणनीतिक फैसलों का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) नए निर्मित ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में स्थानांतरित हो रहा है। शुक्रवार दोपहर यह ऐतिहासिक बदलाव औपचारिक रूप से शुरू होगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साउथ ब्लॉक में अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने वाले है। सूत्रों के अनुसार, यह कैबिनेट बैठक साउथ ब्लॉक में होने वाली आखिरी उच्चस्तरीय बैठक होगी। ऐतिहासिक दृष्टि से साउथ ब्लॉक का संबंध स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक यात्रा से गहराई से जुड़ा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, देश की पहली कैबिनेट बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में साउथ ब्लॉक में ही आयोजित की गई थी। यही इमारत दशकों तक रक्षा और विदेश नीति जैसे अहम मंत्रालयों का भी केंद्र रही। बता दें कि साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण 1931 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुआ था। रायसीना हिल पर मौजूद ये दोनों इमारतें लंबे समय तक भारत की सत्ता का केंद्र रही हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय का इतिहास भी दिलचस्प रहा है। 1947 में इस ‘प्रधानमंत्री सचिवालय’ (पीएमएस) के रूप में एक छोटे प्रशासनिक सहयोगी ढांचे के तौर पर शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री को बुनियादी प्रशासनिक सहायता प्रदान करना था। 1964 में लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएमएस को ‘एलोकेशन ऑफ बिजनेस रूल्स’ के तहत वैधानिक दर्जा मिला, जिससे इसकी संरचना और अधिकारों में बड़ा बदलाव आया। बाद के वर्षों में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में इस कार्यालय की शक्ति और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 1977 में मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्रित्व काल में इसका नाम बदलकर औपचारिक रूप से ‘प्रधानमंत्री कार्यालय’ (पीएमओ) किया गया। अब पीएमओ के स्थानांतरण के बाद रक्षा और विदेश मंत्रालय भी आने वाले हफ्तों में साउथ ब्लॉक से अन्य दफ्तरों में शिफ्ट होने है। इस क्रमिक बदलाव का अर्थ है कि देश की सत्ता का पारंपरिक केंद्र पूरी तरह रायसीना हिल से बाहर स्थानांतरित हो जाएगा। उधर, नॉर्थ ब्लॉक को पहले ही पूरी तरह खाली हो गया है। आशीष दुबे / 12 फरवरी 2026