क्षेत्रीय
12-Feb-2026
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सिंगरौली-(ई एम एस )जिले के फुटहड़वा पंचायत में वर्ष 2023-24 के दौरान जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) फंड से प्रस्तावित नाली निर्माण कार्य में बड़ा घोटाला सामने आया है। प्राथमिक पाठशाला से आदिवासी बस्ती तक बनाई जाने वाली नाली 14 लाख 41 हजार की नाली अपने सुविधा अनुकूल लगभग दो लाख खर्च कर भुइघरवा पीसीसी से मोहन सिंह के घर तक लगभग डेढ़ सौ मीटर घटिया निर्माण कर कागजों में कार्य पूर्ण दर्शा पूरा भुगतान आहरित कर लिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा मामला पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र का है। *आदिवासी बस्ती के नाम पर कागजी विकास-* जानकारी के अनुसार, बरसात के समय जल भराव की समस्या से जूझ रही आदिवासी बस्ती को राहत देने के उद्देश्य से यह नाली स्वीकृत की गई थी। लेकिन निर्माण स्थल पर बिना खुदाई घटिया आधा अधूरा निर्माण हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है घटिया कार्य का रूपरेखा बनाकर पूरी राशि निकाल ली गई और फाइलों में निर्माण पूर्ण दर्शा दिया गया। “हम लोग हर साल पानी और कीचड़ में जीते हैं, लेकिन कागजों में हमें सुविधा मिल चुकी है,” यह- एक ग्रामीण का कहना है। *राज्य मंत्री के क्षेत्र का विकास व्यवस्था सवालों के घेरे में-* यह मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि यह पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह के विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में स्थानीय जन प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में यदि (डीएमएफ) जैसी महत्वपूर्ण निधि भी पारदर्शी तरीके से खर्च नहीं हो पा रही है, तो विकास के दावों की वास्तविकता क्या है — यह बड़ा सवाल बन गया है। *डीएमएफ फंड विकास या दस्तावेजी दिखावा-* डीएमएफ फंड खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक विशेष व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करना है। लेकिन फुटहड़वा का यह मामला बताता है कि फंड का उपयोग जमीनी हकीकत से अधिक कागजों में हो रहा है। यदि नाली जैसे छोटे आवश्यक कार्य में भी गुणवत्ता की पारदर्शिता नहीं है, तो बड़े कार्यों की स्थिति क्या होगी — यह चिंता का विषय है। *ग्रामीणों में आक्रोश जांच कार्यवाही की मांग-* ग्रामीणों ने मांग की है कि तकनीकी टीम से स्थल निरीक्षण कराया जाए, संबंधित सरपंच, सचिव और उपयंत्री की भूमिका की जांच हो दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज की जाए आहरित राशि की वसूली हो, और तत्काल पूर्ण वास्तविक निर्माण कार्य कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे सरपंच के विरुद्ध न्यायालय का अंतिम रास्ता अपनाएंगे। *क्या जवाब देंगे जिम्मेदार-* अब सवाल यह है कि राज्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में हो रहे इस कथित भ्रष्टाचार पर क्या कार्रवाई होती है? क्या आदिवासी बस्ती को वास्तविक सुविधा मिलेगी या विकास सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगा? फुटहड़वा की यह घटना न केवल एक पंचायत का मामला है, बल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गई है।रिपोर्ट आर एन पाण्डेय