देहरादून (ईएमएस)। उत्तराखंड के कई सामाजिक संगठन एवं राजनीतिक संगठनों ने मुखर होकर उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन राष्ट्रपति को प्रेषित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप चमोली ने उत्तराखंड में लोकायुक्त का न होना राज्य के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आज भ्रष्टाचार केवल एक आरोप नहीं बल्कि एक गंभीर जनसमस्या भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े पदों तक, जनता की बार-बार यह शिकायत रहती है कि उनकी सुनवाई नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त इसलिए जरूरी है क्योंकि यह सरकार से स्वतंत्र एक ऐसी संस्था है, जो मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और उच्च अधिकारियों तक की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर सकती है। जब जांच सरकार के अधीन होती है, तो निष्पक्षता पर सवाल उठता है, लेकिन लोकायुक्त उस दबाव से मुक्त होता है। चमोली ने उत्तराखंड में लोकायुक्त का न होना राज्य के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है, जहां संसाधन पहले से ही सीमित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में यदि भ्रष्टाचार पर सख्त और प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो यह राज्य के विकास, जनता के अधिकारों और भविष्य तीनों के लिए घातक सिद्ध होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना लोकायुक्त के भ्रष्टाचार बेलगाम होता है और जवाबदेही समाप्त हो जाती है। इसलिए राज्यहित में पूर्णतः स्वतंत्र, पारदर्शी और सशक्त लोकायुक्त की तत्काल स्थापना आवश्यक है, पर दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई यह है जब तक लोकायुक्त सक्रिय नहीं होगा, तब तक न पारदर्शिता आएगी और न ही भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी। पौडी बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नमन चंदोला ने कहा कि आज उत्तराखंड की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त की तत्काल और स्वतंत्र नियुक्ति की जाए। उन्होंने कहा कि अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा। शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/12 फरवरी 2026