लेख
13-Feb-2026
...


(14 फ़रवरी जयंती पर विशेष) सुषमा स्वराज भारतीय राजनीति की उन विरल हस्तियों में से थीं जिन्होंने अपने व्यक्तित्व, वाक्पटुता, संवेदनशीलता और कार्यकुशलता से जनमानस में विशेष स्थान बनाया। वे केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत, कुशल प्रशासक और करुणामयी नेता थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने लंबे समय तक देश की सेवा की और विशेष रूप से भारत की विदेश मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल ऐतिहासिक माना जाता है। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सेवा का प्रतीक है।। सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला कैंट में हुआ था। उनके पिता श्री हरदेव शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे, जिससे बचपन से ही उनके भीतर राष्ट्रसेवा की भावना विकसित हुई। उन्होंने अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से विधि (एल.एल.बी.) की डिग्री प्राप्त की। छात्र जीवन में वे एक उत्कृष्ट वक्ता और सक्रिय छात्रनेता रहीं। वे कई बार ‘सर्वश्रेष्ठ वक्ता’ का पुरस्कार जीत चुकी थीं, जिससे उनकी भाषण कला का अंदाजा लगाया जा सकता है। सुषमा स्वराज ने बहुत कम आयु में राजनीति में प्रवेश किया। मात्र 25 वर्ष की उम्र में वे हरियाणा विधानसभा की सदस्य बनीं और 27 वर्ष की आयु में हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गईं। उस समय वे देश की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री थीं। यह उनकी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और दृढ़ निश्चय का प्रमाण था। उन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई और जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से भी जुड़ी रहीं। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद सुषमा स्वराज ने पार्टी के संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे कई बार लोकसभा और राज्यसभा की सदस्य रहीं। वर्ष 1998 में वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं, हालांकि उनका कार्यकाल अल्पकालिक रहा। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली। हर पद पर उन्होंने दक्षता और ईमानदारी से कार्य किया। सुषमा स्वराज की पहचान एक ओजस्वी वक्ता के रूप में भी रही। संसद में उनके भाषण तार्किक, प्रभावशाली और मर्यादित होते थे। वे विपक्ष में रहते हुए भी अपनी बात मजबूती से रखती थीं और सत्ता में रहते हुए भी लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती थीं। वे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समान दक्षता से बोलती थीं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में दिया गया उनका भाषण विशेष रूप से सराहा गया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को मजबूती प्रदान की। नेता प्रतिपक्ष के रूप में सुषमा स्वराज भारतीय संसदीय लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह पद केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि सरकार को जवाबदेह बनाने, नीतियों की समीक्षा करने और जनता की आवाज़ को संसद में प्रभावी ढंग से उठाने का दायित्व भी निभाता है। सुषमा स्वराज ने वर्ष 2009 से 2014 तक 15वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने अपनी वाक्पटुता, तर्कशक्ति, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से इस पद की गरिमा को नई ऊँचाई दी नेता प्रतिपक्ष के रूप में सुषमा स्वराज की सबसे बड़ी पहचान उनकी प्रभावशाली और मर्यादित वक्तृत्व शैली थी। वे अपने भाषणों में तथ्यों, तर्कों और उदाहरणों का संतुलित उपयोग करती थीं। उनकी भाषा में तीखापन तो होता था, लेकिन वह कभी व्यक्तिगत कटाक्ष या असंसदीय शब्दों तक नहीं पहुँचता था। वे सरकार की नीतियों की कठोर आलोचना करती थीं, परंतु सदैव संसदीय मर्यादा का पालन करती थीं। जब भी संसद में कोई महत्वपूर्ण विधेयक या मुद्दा चर्चा के लिए आता, सुषमा स्वराज विपक्ष की ओर से स्पष्ट और सुविचारित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती थीं। उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाता था, क्योंकि वे केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करती थीं, बल्कि रचनात्मक सुझाव भी देती थीं। भ्रष्टाचार के मुद्दों पर मुखर भूमिका 15वीं लोकसभा के दौरान केंद्र में तत्कालीन सरकार के विरुद्ध कई बड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जैसे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कोयला आवंटन घोटाला (कोलगेट), कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला आदि। इन मुद्दों पर सुषमा स्वराज ने विपक्ष की ओर से सशक्त आवाज़ उठाई। उन्होंने संसद में इन मामलों की निष्पक्ष जाँच और जवाबदेही की मांग की। कई बार संसद में गतिरोध की स्थिति बनी, लेकिन उनका तर्क था कि जब तक गंभीर आरोपों पर स्पष्टता नहीं आएगी, तब तक सरकार को जवाब देना होगा। उनके नेतृत्व में विपक्ष ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग उठाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाया। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुषमा स्वराज का मानना था कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने की पक्षधर थीं। जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या किसी आपात स्थिति से जुड़ा मुद्दा आता, वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देती थीं उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय सुरक्षा या आतंकवाद जैसे विषयों पर उन्होंने सरकार को समर्थन दिया, साथ ही आवश्यक प्रश्न भी उठाए। यह संतुलन उनके परिपक्व नेतृत्व का प्रमाण था। महिला नेतृत्व की सशक्त छवि नेता प्रतिपक्ष के रूप में सुषमा स्वराज का कार्यकाल भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व की सशक्त उपस्थिति का भी प्रतीक था। वे लोकसभा में इस महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने वाली पहली पूर्णकालिक महिला नेता थीं। उनकी उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि महिलाएँ भी संसदीय राजनीति में उच्चतम स्तर पर प्रभावी नेतृत्व कर सकती हैं वे महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और जनहित के मुद्दों पर विशेष रूप से संवेदनशील थीं। उन्होंने महिला सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सरकार को कठोर प्रश्नों के कटघरे में खड़ा किया। संवाद और सहमति की राजनीति सुषमा स्वराज केवल आक्रामक विपक्षी नेता नहीं थीं, बल्कि वे संवाद और सहमति की राजनीति में विश्वास रखती थीं। वे सत्ता पक्ष के नेताओं से व्यक्तिगत स्तर पर भी सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखती थीं। इससे संसद में कई बार जटिल मुद्दों पर सहमति बनाने में सहायता मिली उनकी राजनीतिक शैली में कटुता की बजाय दृढ़ता और स्पष्टता थी। वे मतभेद रखती थीं, परंतु मनभेद नहीं। यही कारण था कि सत्ता पक्ष के कई नेता भी उनका सम्मान करते थे। जनहित के मुद्दों की प्रभावी पैरवी नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने महंगाई, किसानों की समस्याएँ, बेरोजगारी, आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक नीतियों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। वे आम जनता की परेशानियों को संसद तक पहुँचाने का माध्यम बनीं। उनका उद्देश्य केवल सरकार को घेरना नहीं, बल्कि जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देना था। संसदीय गरिमा और नैतिकता सुषमा स्वराज की एक विशेषता यह थी कि वे संसदीय परंपराओं और मर्यादाओं का गहरा सम्मान करती थीं। उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत हमलों या असंयमित भाषा का सहारा नहीं लिया। उनका मानना था कि विपक्ष की शक्ति उसकी नैतिकता और तर्क में होती है, न कि केवल शोर-शराबे में उनकी कार्यशैली ने यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि एक सशक्त विपक्ष लोकतंत्र को मजबूत करता है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि नेता प्रतिपक्ष का पद केवल राजनीतिक रणनीति का नहीं, बल्कि नैतिक नेतृत्व का भी पद है। सुषमा स्वराज ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में यह सिद्ध किया कि एक सशक्त और जिम्मेदार विपक्ष लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने अपने कार्यकाल में सरकार को जवाबदेह बनाया, जनता की आवाज़ को बुलंद किया और संसदीय परंपराओं की रक्षा की। उनका व्यक्तित्व दृढ़ता और सौम्यता का अद्भुत संगम था। भारतीय राजनीति में उनका योगदान केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की संरक्षक के रूप में सदैव याद किया जाएगा। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार में सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री बनाया गया। इस पद पर उनका कार्यकाल अत्यंत सफल और लोकप्रिय रहा। उन्होंने विदेश मंत्रालय को जनसामान्य से जोड़ दिया। ट्विटर जैसे सोशल मीडिया माध्यम का उपयोग कर उन्होंने विदेशों में फंसे भारतीयों की सहायता की। चाहे यमन से भारतीयों की सुरक्षित वापसी का अभियान हो या किसी संकट में फंसे नागरिक को पासपोर्ट और वीजा संबंधी मदद—सुषमा स्वराज हर समय तत्पर रहती थीं। उनकी संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के कारण वे “जनता की विदेश मंत्री” के रूप में प्रसिद्ध हुईं। उनकी कार्यशैली में मानवीयता स्पष्ट झलकती थी। वे किसी भी व्यक्ति की समस्या को गंभीरता से लेती थीं और उसे हल करने का हर संभव प्रयास करती थीं। उन्होंने अनेक बार आधी रात को भी ट्वीट का उत्तर देकर सहायता सुनिश्चित की। इससे जनता के बीच उनके प्रति विश्वास और सम्मान और अधिक बढ़ा। उन्होंने यह सिद्ध किया कि तकनीक का उपयोग शासन को अधिक उत्तरदायी और प्रभावी बनाने में किया जा सकता है। सुषमा स्वराज ने वर्ष 2014 से 2019 तक भारत की विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। यह कालखंड भारत की विदेश नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इस दौरान वैश्विक राजनीति में तेजी से परिवर्तन हो रहे थे—आतंकवाद, पश्चिम एशिया में संघर्ष, भारत-चीन संबंध, अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी और पड़ोसी देशों के साथ संतुलन जैसे कई मुद्दे प्रमुख थे। सुषमा स्वराज ने अपने शांत, संयमित और प्रभावी नेतृत्व से भारत की विदेश नीति को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया ।। सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्रालय की छवि को पूरी तरह बदल दिया। पहले विदेश मंत्रालय को आम नागरिकों से दूर और औपचारिक माना जाता था, लेकिन उन्होंने इसे जनसुलभ बनाया। उन्होंने सोशल मीडिया, विशेषकर ट्विटर, का प्रभावी उपयोग किया। विदेशों में फँसे भारतीयों की मदद के लिए त्वरित कार्रवाई की। पासपोर्ट, वीजा, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता के मामलों में व्यक्तिगत रुचि ली। यमन संकट (ऑपरेशन राहत, 2015) के दौरान हजारों भारतीयों को सुरक्षित निकालना उनकी कूटनीतिक और मानवीय सफलता का बड़ा उदाहरण है। इससे भारत की वैश्विक छवि एक जिम्मेदार और संवेदनशील राष्ट्र के रूप में मजबूत हुई। भारत की विदेश नीति में “पड़ोसी पहले” दृष्टिकोण महत्वपूर्ण रहा। सुषमा स्वराज ने नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ संबंधों को मजबूत करने में भूमिका निभाई बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा समझौते को आगे बढ़ाने में सहयोग किया। क्षेत्रीय सहयोग मंचों जैसे सार्क और बिम्सटेक में सक्रिय भागीदारी निभाई उन्होंने दक्षिण एशिया में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को सुदृढ़ करने में योगदान दिया। आतंकवाद के विरुद्ध भारत की मजबूत आवाज़ संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषणों के माध्यम से सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाया उन्होंने आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर किया।अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उनकी कूटनीतिक दृढ़ता के कारण भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर व्यापक समर्थन मिला। वैश्विक शक्तियों के साथ रणनीतिक संबंध उनके कार्यकाल में भारत ने अमेरिका, रूस, जापान, फ्रांस और यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को और गहरा किया। अमेरिका के साथ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई। जापान के साथ आर्थिक और बुनियादी ढाँचे के सहयोग को बढ़ावा मिला रूस के साथ पारंपरिक मित्रता को बनाए रखते हुए संतुलन कायम रखा उन्होंने “बहुध्रुवीय कूटनीति” को संतुलित ढंग से आगे बढ़ाया। भारतीय प्रवासी नीति को सशक्त बनाना भारत दुनिया के सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक का देश है। सुषमा स्वराज ने प्रवासी भारतीयों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पहल की पासपोर्ट सेवाओं को सरल और तेज बनाया। इससे विदेशों में बसे भारतीयों का भारत सरकार पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ। मानवीय कूटनीति सुषमा स्वराज की विदेश नीति केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें मानवीय दृष्टिकोण भी स्पष्ट था। संकटग्रस्त देशों में भारतीयों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों की भी सहायता की गई चिकित्सा वीजा के मामलों में उदार नीति अपनाई गई, यहाँ तक कि पाकिस्तान के नागरिकों को भी मानवीय आधार पर सहायता दी गई इससे भारत की छवि एक उदार और सहानुभूतिपूर्ण राष्ट्र के रूप में उभरी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर सुषमा स्वराज ने भारत की नीतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया उन्होंने हिंदी में भाषण देकर भारतीय भाषा और संस्कृति का सम्मान बढ़ाया। सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक न्याय जैसे मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट किया उनकी वाक्पटुता और संतुलित भाषा ने भारत की साख को मजबूत किया । संतुलित और गरिमामय कूटनीति उनकी कार्यशैली में आक्रामकता के बजाय संतुलन और गरिमा थी वे विवादों को बढ़ाने के बजाय संवाद और समाधान पर जोर देती थीं कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने संयम बनाए रखा यह गुण भारत की विदेश नीति को स्थिर और विश्वसनीय बनाता था। भारत की विदेश नीति की सफलता में सुषमा स्वराज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने अपने नेतृत्व, संवेदनशीलता और दृढ़ता से भारत को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार, शक्तिशाली और मानवीय राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में योगदान दिया। सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने कई भाषणों के माध्यम से पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़े शब्दों में घेरा। विशेष रूप से 2016, 2017 और 2018 के उनके भाषणों को काफी चर्चा मिली। उनका अंदाज़ संयमित लेकिन बेहद तीखा और तथ्यपूर्ण होता था। उन्होंने पाकिस्तान को सीधे नाम लेकर आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला बताया। अपने 2016 के भाषण में, उरी हमले के बाद, सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत शांति, विकास और प्रगति की राह पर चल रहा है। वहीं पाकिस्तान “आतंकवाद की फैक्ट्री” चला रहा है ,उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देता है और उन्हें भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की नीति को “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” बताया। “हम आईटी बनाते हैं, वे आतंकवादी”2017 के भाषण में उन्होंने एक बहुत प्रभावशाली तुलना की, जो काफी चर्चित हुई। उन्होंने कहा “भारत ने आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थान बनाए,पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन बनाए।” इस एक पंक्ति ने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि भारत विकास और शिक्षा की राह पर है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है। मानवाधिकार मुद्दे पर जवाब पाकिस्तान अक्सर कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाता था। सुषमा स्वराज ने इसका जवाब देते हुए कहा पाकिस्तान को कश्मीर की चिंता करने से पहले अपने देश में मानवाधिकारों की स्थिति सुधारनी चाहिए बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद से पीड़ित होने का दावा करता है, लेकिन वही आतंकवाद को पनाह देता है। ओसामा बिन लादेन का उदाहरण उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में छिपा मिला। यह इस बात का प्रमाण है कि आतंकवादियों को पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मिलती है। यह तथ्यात्मक उदाहरण देकर उन्होंने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया । संयमित लेकिन प्रभावशाली भाषा सुषमा स्वराज की खासियत यह थी कि वे भावनात्मक आक्रोश के बजाय तथ्यों और तर्कों के साथ बात करती थीं उनकी भाषा मर्यादित लेकिन सख्त होती थी। उन्होंने कभी असंसदीय शब्दों का प्रयोग नहीं किया, लेकिन संदेश स्पष्ट और तीखा होता था। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकता की अपील उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से मांग की कि आतंकवाद को किसी भी धर्म से न जोड़ा जाए। आतंकवाद के खिलाफ ठोस और समान नीति अपनाई जाए जो देश आतंकवाद को समर्थन देते हैं, उन्हें अलग-थलग किया जाए इससे भारत की स्थिति एक जिम्मेदार और शांति-प्रिय राष्ट्र के रूप में मजबूत हुई। पाकिस्तान के “दो चेहरे” उजागर किए उन्होंने कहा कि एक ओर पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है दूसरी ओर वही आतंकवादियों को समर्थन देता है। उन्होंने इसे “दोहरे चरित्र” की नीति बताया। सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश के विदिशा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहीं और इस क्षेत्र के विकास के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किए। विदिशा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहाँ ग्रामीण आबादी अधिक है और आधारभूत सुविधाओं के विकास की विशेष आवश्यकता रही है। सुषमा स्वराज ने अपने कार्यकाल में इस क्षेत्र की आवश्यकताओं को समझते हुए सड़क, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पर्यटन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की। रेल सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण विदिशा रेलवे स्टेशन मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। सुषमा स्वराज ने रेलवे सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए उनके कार्यकाल में विदिशा रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए योजनाएँ आगे बढ़ीं कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की स्वीकृति दिलाई गई, जिससे यात्रियों को सीधे संपर्क की सुविधा मिली रेल लाइनों के दोहरीकरण और विद्युतीकरण की प्रक्रिया को गति मिली, जिससे आवागमन सुगम हुआ प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने, यात्री प्रतीक्षालयों और पेयजल सुविधाओं में सुधार जैसे कार्य किए गए इन प्रयासों से क्षेत्र के व्यापार, रोजगार और आवागमन को बढ़ावा मिला। सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारशिला होता है। सुषमा स्वराज ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से विदिशा में सड़क विकास पर विशेष ध्यान दिया राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन और चौड़ीकरण के लिए पहल की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों का निर्माण और मरम्मत कराई गई। कई गाँवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए संपर्क मार्ग बनाए गए पुलों और छोटे पुलिया निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा ऋतु में भी आवागमन सुचारु हुआ इन कार्यों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत हुआ और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई। पेयजल और ग्रामीण बुनियादी सुविधाएँ विदिशा क्षेत्र में जल संकट एक महत्वपूर्ण समस्या रही है। सुषमा स्वराज ने सांसद निधि के माध्यम से पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता दी हैंडपंप, ट्यूबवेल और जल टंकियों का निर्माण कराया गया। कई गाँवों में पाइपलाइन आधारित पेयजल योजनाओं को समर्थन मिला पंचायत भवन, सामुदायिक भवन और श्मशान घाटों के निर्माण में सांसद निधि का उपयोग किया गया इन पहलों से ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार हुआ और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ। शिक्षा क्षेत्र में योगदान सुषमा स्वराज ने शिक्षा को सामाजिक विकास का आधार माना। उनके प्रयासों से सरकारी स्कूलों में कक्षाओं के निर्माण और मरम्मत कार्य कराए गए छात्राओं के लिए शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई महाविद्यालयों में आधारभूत ढाँचे के विस्तार के लिए सहायता दी गई। मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के कार्यक्रमों में सहभागिता की। इन प्रयासों से शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी और शैक्षणिक वातावरण में सुधार हुआ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए भी उन्होंने कार्य किया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन के लिए धन उपलब्ध कराया अस्पतालों में चिकित्सा उपकरण और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग किया ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों को प्रोत्साहन दिया गया इन प्रयासों से आम नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ प्राप्त हुईं पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण विदिशा क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ सांची स्तूप (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल), उदयगिरि गुफाएँ और अन्य प्राचीन स्थल स्थित हैं सुषमा स्वराज ने पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास किए ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के लिए संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने में भूमिका निभाई पर्यटन के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े। कृषि और किसानों के लिए प्रयास विदिशा कृषि प्रधान क्षेत्र है। सुषमा स्वराज ने किसानों की समस्याओं को संसद में उठाया और समाधान के लिए पहल की सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया फसल बीमा और कृषि योजनाओं के लाभ किसानों तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वयं सहायता समूहों और महिला समूहों को प्रोत्साहन दिया इन कदमों से किसानों की आय और आत्मनिर्भरता को बल मिला। जनता से सीधा संवाद सुषमा स्वराज की सबसे बड़ी विशेषता उनका जनता से सीधा जुड़ाव था। वे नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा करती थीं और लोगों की समस्याएँ सुनती थीं। उनका व्यक्तित्व सरल और सुलभ था, जिससे आम जनता अपने मुद्दे सीधे उनके सामने रख पाती थी। वे समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से समन्वय करती थीं। उनकी कार्यशैली में संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का समन्वय था। वे क्षेत्र को केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि विकास की व्यापक सोच के साथ देखती थी। 6 अगस्त 2019 को ह्रदयगति रुकने से उनका निधन हो गया,उनके निधन से भारतीय राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई। वह भारतीय राजनीति का सशक्त हस्ताक्षर थीं उनकी वाणी ने विदिशा से लेकर विदेश तक अमिट छाप छोड़ी यद्यपि आज भौतिक रूप से वह हमारे बीच में नहीं हैं पर उनकी संवेदनशीलता ,ममता ममतामय सहृदयता सदैव हमें लोकपथ के कर्तव्यपथ पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।। (सुरेन्द्र शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा मध्यप्रदेश, संभाग प्रभारी भाजपा निमाड़ संभाग।) ईएमएस / 13 फरवरी 26