ज़रा हटके
14-Feb-2026
...


-वैज्ञानिकों का कहना- क्लाइमेट चेंज प्राकृतिक उतार-चढ़ाव को दबा रहा है और बढ़ेगी गर्मी ब्यूनस आयर्स (ईएमएस)। दक्षिणी गोलार्ध के कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और भयानक जंगल की आग लगी है। अर्जेंटीना, चिली, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में तापमान आसमान छू रहा है। आग ने बड़े इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानों की वजह से हुए क्लाइमेट चेंज प्राकृतिक उतार-चढ़ाव को पूरी तरह दबा रहा है। आगे और भी खतरनाक गर्मी पड़ सकती है। मौसम बदल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में जनवरी-फरवरी में एक विशाल हीट डोम ने पूरे देश को घेर लिया है। कई जगहों पर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। यह अब तक की सबसे गर्म जनवरी में से एक थी। अर्जेंटीना के पैटागोनिया क्षेत्र में दूरदराज के जंगलों में आग लगी, जिसमें लॉस एलेर्सेस नेशनल पार्क भी चपेटे में आ गया है। यहां 3000 साल पुराने पेड़ हैं। चिली के तटीय इलाकों में आग से 21 लोगों की मौत हो गई है। दक्षिण अफ्रीका में कई सालों में सबसे भयानक जंगल की आग लगी है। सूखा और गर्मी ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। ला नीना के बावजूद इतनी गर्मी क्यों? रिपोर्ट के मुताबिक प्रशांत महासागर में ठंडे पानी की वजह से दुनिया अभी कमजोर ला नीना के प्रभाव में है, जो सामान्यतः ठंडक लाती है। ला नीना दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी। फिर भी रिकॉर्ड गर्मी पड़ रही है। जलवायु वैज्ञानिक कहते हैं कि इंसानों द्वारा पैदा किए गए जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक बदलावों को पूरी तरह दबा रहा है। अगर 2026 में न्यूट्रल स्थिति या अल नीनो आया तो और ज्यादा खतरनाक गर्मी पड़ेगी। अल नीनो वैश्विक तापमान को और बढ़ाता है। 2026 का वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से करीब 1.46डिग्री सेल्सियस ज्यादा होगा। यह लगातार चौथा साल होगा जब तापमान 1.4 डिग्री से ऊपर रहेगा। अगर बड़ा अल नीनो जल्दी आया, तो 2026 सबसे गर्म साल बन सकता है। पेरिस समझौता का लक्ष्य था कि ग्लोबल वार्मिंग 1.5डिग्री से नीचे रहे। हम उस सीमा के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। विश्व मौसम संगठन ने कहा कि पिछले तीन साल रिकॉर्ड में सबसे गर्म थे। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी। गर्मी और आग न सिर्फ जान-माल का नुकसान कर रही हैं, बल्कि जैव विविधता और प्राचीन इकोसिस्टम को भी खतरे में डाल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना ही एकमात्र स्थायी समाधान है। सिराज/ईएमएस 14 फरवरी 2026