ज़रा हटके
14-Feb-2026
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-हाइपरसोनिक हथियारों के साथ जहाजों पर लगाएगा हाईपावर लेजर सिस्टम वॉशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी नौसेना प्रमुख एडमिरल डैरिल कॉडले के बयान से पता चलता है कि वॉशिंगटन अब चीन की बढ़ती नौसैनिक और ड्रोन-आधारित युद्ध क्षमता को लेजर हथियारों से कुचलने की रणनीति बना रहा है। कॉडले का संदेश दो टूक है अब प्रयोगों का दौर खत्म और चीन के ए2/एडी नेटवर्क को तोड़ने का समय आ गया है। उन्होंने माना कि अब तक अमेरिकी नौसेना ने जहाजों पर लेजर हथियारों को लेकर जितना आक्रामक रुख होना चाहिए था, वह नहीं अपनाया, लेकिन अब उनकी कमान में यह बदलने वाला है। असल फोकस ट्रंप-क्लास नए बैटलशिप हैं, जिन्हें चीन के खिलाफ समुद्री युद्ध का गेम-चेंजर माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन जहाजों में हाइपरसोनिक हथियारों के साथ-साथ हाईपावर लेजर सिस्टम लगाए जाएंगे, जो चीनी ड्रोन स्वार्म्स, सेंसर नेटवर्क और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम को सेकंडों में अंधा कर सकते हैं। चीन जिस तरह दक्षिण चीन सागर और ताइवान स्ट्रेट में ड्रोन, सैचुरेशन अटैक और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर निर्भर रणनीति विकसित कर रहा है, उसके सामने लेजर हथियार अमेरिका के लिए सबसे सटीक जवाब बनते जा रहे हैं। ना गोला-बारूद खत्म होने का डर, ना री-लोडिंग की जरूरत और हमला रोशनी की रफ्तार से। यूएसएस प्रेबल पर लेजर सिस्टम की सफल तैनाती और 2025 में इसका ऑपरेशनल टेस्ट इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब चीन को सिर्फ चेतावनी नहीं दे रहा, बल्कि युद्ध-क्षमता मैदान में उतार चुका है। ओडिन जैसे लेजर पहले ही दुश्मन के आईएसआर सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए तैनात हैं। नई फाइटिंग इंटेक्शन के तहत अमेरिकी नौसेना एक समर्पित डायरेक्ट एनर्जी रणनीति बना रही है, ताकि लेजर हथियारों को फ्लीट की स्थायी रीढ़ बनाया जा सके। इसका सीधा मतलब है चीन के खिलाफ भविष्य की जंग में अमेरिकी जहाज मिसाइलों से पहले लेजर से वार करेंगे। यह महज टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं है, बल्कि चीन के नौसैनिक विस्तार को रोकने का रणनीतिक एलान है। अगर यह योजना लागू होती है, तो आने वाले दशक में पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में जंग मिसाइलों से कम और लेजर बीम्स से ज्यादा लड़ी जाएगी और उस जंग की पहली चोट चीन के नेटवर्क-सेंट्रिक वॉर मॉडल पर होगी। सिराज/ईएमएस 14 फरवरी 2026