राष्ट्रीय
14-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में हर साल बढ़ते हृदय रोग के मामलों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान, तनाव और काम का बढ़ता दबाव आज युवाओं तक को दिल, मधुमेह और थायराइड जैसी गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहा है। इस बारे में आयुर्वेद का मानना है कि कई बीमारियों का समाधान हमारे घर की रसोई में ही छिपा है। दिल से जुड़े रोगों की जड़ में आयुर्वेद तनाव और शरीर में बढ़ते आम यानी विषाक्त तत्वों को मानता है। असंतुलित भोजन, पैक्ड फूड का अधिक सेवन, मीठे की बढ़ती आदत, तनाव और कम नींद ये सभी हृदय रोगों को आमंत्रित करते हैं। लेकिन घरेलू आहार में शामिल कुछ सरल चीजें, खासकर दालें और फलियां, दिल को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारतीय थाली का अभिन्न हिस्सा दालें और फलियां रोजाना सेवन के लिए आदर्श मानी जाती हैं। इनमें मौजूद घुलनशील फाइबर खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल पहले से मौजूद होता है और जब भोजन के साथ अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल शरीर में प्रवेश करता है, तो इसकी मात्रा बढ़कर रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालने लगती है। यही स्थिति दिल की धड़कन पर असर डालती है, घबराहट और सांस फूलने जैसी परेशानियां पैदा करती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाती है। दालों और फलियों का लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स मधुमेह को नियंत्रित करने में भी सहायक होता है, साथ ही यह रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि दिल की सेहत के लिए कौन सी दालें और फलियां अधिक फायदेमंद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लोबिया, मसूर, राजमा, मूंग, चना और मोठ की दाल हृदय के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती हैं। दिल की सेहत के लिए सिर्फ दालें ही नहीं, बल्कि संपूर्ण आहार में सुधार जरूरी है। रोजाना भोजन में ताजे सलाद, सूप, रेशेदार सब्जियां और ब्राउन राइस शामिल करना चाहिए। ब्राउन राइस में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और कैंसर-रोधी गुण शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं। सुदामा/ईएमएस 14 फरवरी 2026