-सर्वे में खुलासा, दुनिया मान रही वहां का कानून सिर्फ दिखावा, जो रईसों की कठपुतली बन गया वाशिंगटन (ईएमएस)। एपस्टीन फाइल्स से हो रहे खुलासों ने अमेरिका जो खुद को ‘मानवाधिकार रक्षक’ कहता है उसकी धज्जियां उड़ रही हैं। एक ग्लोबल सर्वे ने अमेरिका के न्याय और मूल्यों की पोल खोलकर रख दी है। सर्वे में शामिल 92फीसदी लोगों ने साफ कहा है कि एपस्टीन कांड ने अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अमेरिका के अमीर और ताकतवर लोगों के पापों का पुलिंदा है। दुनिया अब मान रही है कि वहां का कानून सिर्फ एक दिखावा है, जो रईसों की कठपुतली है। अमेरिकी इंसाफ के नाटक से अब दुनिया भर के लोगों का भरोसा उठ गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे के नतीजे अमेरिका को चिढ़ा रहे हैं। 85.1फीसदी लोगों को फाइलों की सच्चाई जानकर गहरा धक्का लगा है। यह मामला अमेरिकी एलीट क्लास के दशकों पुराने काले कारनामों का सबूत है। 97.1फीसदी लोगों ने माना कि यह कांड मानवीय अंतरात्मा का अपमान है और अमीरों के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस कांड में शामिल अमीर और बड़े नामों की आज तक कोई जांच नहीं हुई। 95.6फीसदी उत्तरदाताओं का कहना है कि अमेरिकी कोर्ट शक्तिशाली लोगों के लिए अलग और आम जनता के लिए अलग कानून चलाते हैं। सर्वे में बताया गया है कि कैसे सच को दबाया जा रहा है। एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज सालों तक कोर्ट में सील बंद पड़े रहे। जब इन्हें जारी किया गया, तो आधे से भी कम फाइलें बाहर आईं। उनमें भी अहम जानकारियों और रसूखदारों के नामों पर काली स्याही लगा दी गई। 93.9फीसदी लोग मानते हैं कि यह ‘चयनात्मक पारदर्शिता’ सिर्फ एक धोखा है। अमेरिकी न्याय प्रणाली अब विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग का ‘सुरक्षा कवच’ बन चुकी है। 89.8फीसदी लोगों ने कहा कि इस मामले ने अमेरिकी कानून की साख को मिट्टी में मिला दिया है। यह पूरा मामला पैसे और पावर के बीच की शिकारी दोस्ती को उजागर करता है। पैसा सत्ता को खरीदता है और सत्ता अपराधियों को बचाती है। इस गंदे खेल में सबसे बड़ी बलि गरीब नाबालिग लड़कियों की दी गई। 92.5फीसदी लोगों ने गरीब और वंचित वर्ग की लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है। 86.7फीसदी लोगों का मानना है कि अब अमेरिका में न्यायिक संरक्षण की उम्मीद करना बेकार है। वहां सामाजिक सुरक्षा की भावना खत्म हो चुकी है। 91.8फीसदी लोगों ने कहा कि एपस्टीन केस ने अमेरिका की ‘मानवाधिकार कूटनीति’ की हवा निकाल दी है। हैरानी की बात यह है कि अमेरिका अपनी कमियों को सुधारने के बजाय इसे राजनीति का अखाड़ा बना रहा है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियां इस मुद्दे को एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने के लिए यूज कर रही हैं। 85.3फीसदी लोगों को लगता है कि इससे समाज में नफरत और विभाजन बढ़ेगा। वहीं 92.7फीसदी लोगों का कहना है कि असली करप्शन तो अभी सामने आना बाकी है। सर्वे में 24 घंटे के अंदर 9,690 लोगों ने अपनी राय दी, जिसने यह साबित कर दिया कि अमेरिकी मूल्यों से दुनिया का मोहभंग हो चुका है। सिराज/ईएमएस 14 फरवरी 2026