अंतर्राष्ट्रीय
14-Feb-2026
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मालदीव,(ईएमएस)। मालदीव और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीपसमूह से जुड़े समुद्री क्षेत्र को लेकर एक नया और गंभीर विवाद सामने आ गया है। मालदीव के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसने उत्तरी चागोस समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक संस्थानों ने इस क्षेत्र को मॉरीशस का हिस्सा माना है। यह कदम सीधे तौर पर इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (आईटीएलओएस) के फैसले को चुनौती देता है। मालदीव रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (एमएनडीएफ) ने एक विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन में कोस्ट गार्ड जहाज ‘धरमवंथा’ और एयर कॉर्प्स के ड्रोन तैनात किए गए हैं। यह अभियान 4 फरवरी से शुरू हुआ और दक्षिणी बेसलाइन से 200 नॉटिकल मील तक फैले समुद्री क्षेत्र में संचालित किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, यह निगरानी अभियान देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मालदीव अपने संविधान और राष्ट्रीय कानूनों के तहत परिभाषित क्षेत्रीय सीमाओं में किसी भी बदलाव को मान्यता नहीं देता। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के संसद में 2026 के लिए दिए गए संबोधन के बाद इस कार्रवाई की घोषणा की गई। मंत्रालय ने संविधान के अनुच्छेद 115(डी) का हवाला देकर कहा कि राष्ट्रपति देश की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, अनुच्छेद 243, सशस्त्र बल अधिनियम और मालदीव समुद्री क्षेत्र अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ये कानून विशेष आर्थिक क्षेत्र सहित समुद्री क्षेत्रों की निरंतर सैन्य निगरानी के लिए कानूनी आधार प्रदान करते हैं। राष्ट्रपति मुइज्जू ने यह भी घोषणा की कि उनकी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह द्वारा मॉरीशस के प्रधानमंत्री को भेजा गया वह पत्र वापस ले लिया है, जिसमें चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता को लेकर रुख स्पष्ट किया गया था। मुइज्जू के अनुसार, यह फैसला कैबिनेट मंत्रियों और स्थानीय व अंतर्राष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श के बाद लिया गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि पिछली सरकार का कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इस घटनाक्रम ने हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। आशीष/ईएमएस 14 फरवरी 2026