वॉशिंगटन (ईएमएस)। दुनिया को अगले साल तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। इसका कारण प्रशांत महासागर में अल नीनो का बनना होगा। मौसम विज्ञान के जानकारों का कहना है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो का बनना 2027 में ग्लोबल तापमान को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा सकता है। ऐसा होने पर साल 2027 पिछले तीन वर्षों के मुकाबले कहीं ज्यादा गर्म रह सकता है। यह इसलिए चिंताजनक है क्योंकि बीते तीन वर्ष पहले ही सबसे गर्म साल रिकॉर्ड किए गए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम एजेंसियों और मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल के आखिर में प्रशांत महासागर में अल नीनो बनने की संभावना जाहिर की है। यह घटना 2027 में ग्लोबल तापमान को अब तक के सबसे ऊंचे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा देगी। पूरी दुनिया में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। मौसम जानकारों ने बताया है कि अभी पक्के तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगा। फिलहाल कोई दावा नहीं किया जा सकता लेकिन प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के फैलाव में इसतरह के संकेत मिले हैं, जो बताते हैं कि 2026 में अल नीनो बन सकता है। अमेरिकी सरकार के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन और ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी ने कहा है कि क्लाइमेट मॉडल अल नीनो का अनुमान लगा रहे हैं। दोनों एजेंसियों ने इसकी चेतावनी दी है। हालांकि दोनों के इस पर दावों में अनिश्चितताएं हैं। अल नीनो कैसे बनता है प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान का चक्र दुनिया भर में मौसम की चरम घटनाओं से जुड़ा हुआ है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पूर्व में औसत से ज्यादा गर्म पानी इकट्ठा होकर अमेरिकी महाद्वीप के तट तक फैलता है, तब इस अल नीनो कहा जाता है। यह ग्लोबल तापमान को बढ़ाता है। वहीं कुछ मॉडल जून से अल नीनो के बनने की संभावना बता रहे हैं। अमेरिकी एजेंसी ने कहा है कि अल नीनो की संभावना बढ़ी हैं। क्लाइमेट साइंटिस्ट एंड्रयू वॉटकिंस ने कहा है कि हमारे पास पश्चिमी ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में बहुत सारा गर्म पानी जमा है। आशीष/ईएमएस 14 फरवरी 2026