ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजों ने जहां सत्ता समीकरण बदलने के संकेत दिए हैं, वहीं अल्पसंख्यक समुदाय की भागीदारी को लेकर भी नई चर्चा शुरु हो गई है। चुनाव में राष्ट्रवादी दल को भारी बढ़त मिली है। इसी बीच हिंदू समुदाय से जुड़े चार उम्मीदवारों की जीत खास तौर पर ध्यान खींच रही है। ताजा नतीजों के मुताबिक बीएनपी ने कुल 211 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि जमात को 68 सीटों पर जीत मिली। इस परिणाम ने सत्ता में बदलाव की संभावना को मजबूत किया है, लेकिन चुनाव की कहानी सिर्फ बहुमत तक सीमित नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ढाका क्षेत्र से वरिष्ठ नेता गायेश्वर चंद्र राय को जीत हासिल हुई है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ते हुए करीब 99 हजार से ज्यादा मत हासिल किए। हाल के समय में हिंदू समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न और हमलों की खबरों के बीच उनकी जीत को प्रतीकात्मक रूप से अहम माना जा रहा है। मगुरा क्षेत्र से निताई राय चौधरी भी जीत गए हैं। उन्हें 147000 से ज्यादा मत मिले। वह पार्टी के अंदर अल्पसंख्यक समुदाय का प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं और उनका संबंध गायेश्वर चंद्र राय से भी बताया जाता है। उनकी जीत से उन क्षेत्रों में दल की स्थिति मजबूत हुई है जहां अल्पसंख्यक आबादी उल्लेखनीय है। रंगामाटी क्षेत्र से वकील दीपेन देवान ने तीसरी जीत दर्ज की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ते हुए संसद में जगह बनाई। बंदरबन क्षेत्र से साचिंग प्रू भी 141000 से ज्यादा वोटों के साथ जीतकर संसद पहुंचे, जिससे कुल चार अल्पसंख्यक प्रतिनिधि इस दल की ओर से चुने गए। इसके विपरीत जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के एकमात्र हिंदू उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। इसका मतलब यह रहा कि इस गठबंधन का कोई भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार संसद तक नहीं पहुंच पाया। चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं। 60 पंजीकृत दलों में से 22 दलों ने ऐसे उम्मीदवार उतारे। इसके बावजूद संसद में उनका प्रतिनिधित्व सीमित ही रहा, जो राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब भी एक चुनौती है। सिराज/ईएमएस 14फरवरी25