क्षेत्रीय
14-Feb-2026
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- पुलिस ने खोला राज , पुलिस जांच में खुला मामला गुना (ईएमएस)। शहर की आदर्श कॉलोनी में किराये से रह रहे कक्षा सातवीं के एक छात्र के अचानक लापता होने से गुरुवार को इलाके में हड़कंप मच गया। परिजन और पुलिस जब उसकी तलाश में जुटे ही थे, तभी शहर से लगे ग्राम बिलोनिया में वह बालक बेहोशी की हालत में मिला। बालक द्वारा दो लोगों पर बेहोशी की दवा सुंघाकर अपहरण कर ले जाने का आरोप लगाए जाने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया। हालांकि पुलिस की तफ्तीश में यह पूरा घटनाक्रम एक झूठी अपहरण की कहानी निकला, जो सायकिल नहीं मिलने की नाराजगी में बच्चे ने खुद गढ़ ली थी। जानकारी के अनुसार आदर्श कॉलोनी में रहने वाला 12 वर्षीय बालक जाटपुरा माध्यमिक स्कूल में कक्षा सातवीं का छात्र है। गुरुवार को वह परीक्षा देने के बाद स्कूल से यह कहकर निकला था कि वह घर जा रहा है, लेकिन घर नहीं पहुंचा। कुछ समय बाद ग्राम बिलोनिया से उसके पिता के पास फोन आया कि एक बच्चा पुल के नीचे बेहोशी की हालत में पड़ा है और ग्रामीणों को आशंका है कि उसे किसी वाहन से यहां छोड़ दिया गया है। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और डायल-112 को भी बुलाया गया। बालक के पिता देवेन्द्र धाकड़ ने बताया कि बिलोनिया से फोन करने वाले व्यक्ति ने पहले बच्चे का नाम पूछा और फिर कहा कि कोई लोग उसे गाड़ी से यहां छोड़ गए हैं। सूचना मिलते ही वे मोटरसाइकिल से करीब दस मिनट में मौके पर पहुंचे। वहां उनका बेटा बेहोशी जैसी हालत में पड़ा था। बच्चे ने ही ग्रामीणों को उनका मोबाइल नंबर दिया था, जिसके बाद गांव वालों ने फोन कर बुलाया। उसी दौरान डायल-112 भी मौके पर पहुंच गई और पुलिस ने बच्चे को थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की। शुरुआत में बच्चे ने पुलिस और परिजनों को बताया कि वह स्कूल के बाहर पानी की बोतल भरने गया था। वहां खड़ी एक कार में बैठे लोगों ने उससे पानी मांगा। जैसे ही वह बोतल देने पहुंचा, पीछे से एक व्यक्ति ने उसे पकड़ लिया और इसके बाद उसे कुछ भी याद नहीं है। उसका कहना था कि दो लोग थे और उसे कहां ले गए, यह भी उसे नहीं पता। उसने यह भी कहा कि उसे बिलोनिया में बेहोशी की हालत में छोड़ा गया। हालांकि पुलिस ने जब बच्चे से विस्तार से और समझाइश के साथ पूछताछ की, तो कहानी में कई विरोधाभास सामने आए। पूछताछ के दौरान बालक ने स्वीकार किया कि उसके पिता ने उसे सायकिल नहीं दिलाई थी, जिससे वह नाराज था। उसे लगता था कि उसकी बहनों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं, लेकिन उसकी बात नहीं मानी जाती। इसी नाराजगी में वह परीक्षा देने के बाद घर जाने के बजाय पैदल ही हाईवे की ओर चल पड़ा और बिलोनिया तक पहुंच गया। लंबा रास्ता पैदल तय करने के कारण वह भूखा-प्यासा हो गया और थकान के चलते बिलोनिया ब्रिज के नीचे सो गया। वहीं से ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ी और पूरे घटनाक्रम ने अपहरण का रूप ले लिया। बच्चे के पिता ने भी बताया कि वे कभी उसके साथ मारपीट नहीं करते और उसकी मां रोज उसे स्कूल छोड़ने और लेने जाती है। घटना वाले दिन भी मां स्कूल गई थी, लेकिन वह उससे एक घंटे पहले ही यह कहकर निकल गया कि वह घर जा रहा है। बालक का यह कदम महज भावनात्मक नाराजगी का परिणाम था, जिसे उसने खुद ही एक झूठी कहानी का रूप दे दिया। इनका कहना है 13 फरवरी को थाना कैंट की डायल-112 को एक व्यक्ति ने सूचना दी थी कि एक 12 साल का बालक रोड पर पड़ा है। जिस पर तत्काल डायल-112 मौके पर पहुंची और बच्चे को थाने लेकर आई। उसका नाम पता कर उसके परिजनों को थाने बुलाया। बच्चे द्वारा पहले तो बताया गया कि एक कार आई और उसे लेकर चली गई। लेकिन जब बच्चे को समझाईश देकर पूछताछ की गई तो उसने पूरी कहानी बताई। उसे उसके पिताजी से शिकायत थी कि उसके पापा उसे सायकिल नहीं दिला रहे हैं। उसका कहना था कि बहनों की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं मेरी नहीं। उसी नाराज होकर पैदल-पैदल हाईवे बिलोनिया तक पहुंचा। उसको पुलिस ने समझाईश दी तो वह माता-पिता के साथ चला गया। – प्रियंका मिश्रा, सीएसपी - सीताराम नाटानी