क्षेत्रीय
14-Feb-2026
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- जिले की सम्‍पूर्ण राजस्‍व सीमा क्षेत्र में फसल कटाई के पश्चात् फसल अवशेषों को जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित राजगढ़(ईएमएस) उपसंचालक कृषि किसान कल्याण तथा कृषि विकास द्वारा कलेक्‍टर एवं जिला दण्‍डाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के संज्ञान में लाया गया है की वर्तमान में गेहूं की अधिकांशतः फसल कटाई कम्बाईन हारवेस्टर द्वारा की जाती है। कम्बाईन हारवेस्टर से कटाई उपरांत फसल की नरवाई में आग लगाने की घटनाओ में तेजी से वृद्धि हुई है। नरवाई जलाने के कारण वायु प्रदुषण एवं आगजनी की घटनाओ से आमजन के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। साथ ही खेत में आग के अनियंत्रित होने पर जनधन, संपत्ति, प्राकृतिक वनस्पति, जीव-जंतु आदि नष्ट हो जाते है। जिससे व्यापक नुकसान होता है एवं भूमि की उर्वराशक्ति कम होती है। कलेक्‍टर एवं जिला दण्‍डाधिकारी डॉ. मिश्रा द्वारा फसल काटने के उपरांत उसके अवशेषों (पराली/नरवाई) को जलाने से रोकने हेतु भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 में प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग करते हुए सम्पूर्ण जिला राजगढ़ राजस्व सीमाक्षेत्र के लिए आदेश पारित किया हैं। जिसमें राजगढ़ जिला अंतर्गत फसल कटाई के पश्चात् फसल अवशेषों को जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाता है। हारवेस्टर मशीन संचालको को यह अनिवार्य होगा की वह हारवेस्टर मशीन के साथ स्ट्रा मेनेजेमेंट सिस्टम लगाकर ही फसल कटाई करेंगे एवं खेत पर ही फसल अवशेषों का भूसा बनाकर निपटान करेंगे। यदि राजगढ़ जिले की सीमा में प्रवेश करने वाले हारवेस्टर मशीन संचालको द्वारा हारवेस्टर में स्ट्रा मेनेजेमेंट सिस्टम नहीं लगाया जाता है, तो क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। साथ ही बिना स्ट्रा मेनेजेमेंट सिस्टम लगी हारवेस्टर मशीन से फसल कटाई कराने पर स्ट्रा रीपर मशीन से भूसा बनवाना अनिवार्य होगा। अन्यथा भूमि मालिक एवं हारवेस्टर मशीन संचालक दोनों पर अलग-अलग राशि 5 हजार रुपये का अर्थदण्ड लगाया जाएगा। हारवेस्टर मशीन संचालको को यह अनिवार्य होगा की वह हारवेस्टर मशीन का प्रकार, मशीन /वाहन नं., स्वामी का नाम, संपर्क नं., कार्यक्षेत्र आदि की सूचना सम्बंधित थाना में दर्ज कराएगें। इस हेतु थाना प्रभारी द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। पर्यावरण विभाग भोपाल द्वारा जारी नोटीफिकेसन अंतर्गत नरवाई में आग लगाना दंडनीय होगा एवं उल्लंघन पर निम्‍नानुसार पर्यावरण क्षति पूर्ति राशि देय होगी। जिसमें ऐसे भू‍मि धारक जिनकी भूमि का क्षेत्र 2 एकड से कम हैं। उन्‍हे 2500 रूपये प्रति घटना, ऐसे भूमि धारक जिनकी भूमि का क्षेत्र 2 एकड से अधिक व 5 एकड से कम है 5 हजार रूपए प्रति घटना एवं ऐसे भूमि धारक जिनकी भूमि का क्षेत्रफल 5 एकड या उससे अधिक है 15 हजार रुपए प्रति घटना रहेगा। अत: उक्‍त आदेश का उल्‍लंघन करने वाले व्‍यक्ति के विरूद्ध भारतीय न्‍याय संहिता 2023 की धारा 233 के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी। -निखिल /राजगढ़/14/2/2026