नई दिल्ली (ईएमएस)। वंदे मातरम मुद्दे पर जामिया मस्जिद के इमाम मुफ्ती डॉ. मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और सरकार से पुनर्विचार की अपील की। वंदे मातरम को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इसी बीच जामिया मस्जिद के मुख्य इमाम और खतीब मुफ्ती डॉ. मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ कहा कि मुसलमान राष्ट्रीय गान का पूरा सम्मान करते हैं और हमेशा करते रहेंगे। इमाम रशादी ने कहा कि हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद लोगों के बीच चिंता का माहौल बना है। उनका कहना है कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियाँ ऐसी हैं जो इस्लामी आस्था और अकीदे से मेल नहीं खातीं। ऐसे में इसे अनिवार्य करना सही कदम नहीं माना जा सकता। उन्होंने अपील की कि इस मुद्दे को इस तरह न उठाया जाए जिससे समाज में तनाव पैदा हो। इमाम ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहाँ का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म के अनुसार जीवन जीने की आजादी देता है। उन्होंने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर फैसले दिए हैं। उनका मानना है कि अगर किसी चीज को जबरन लागू किया जाता है तो इससे नागरिकों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/14/फरवरी/2026