- नोडल अधिकारी पर आदिवासी समूह की दीदियों से दो लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी मण्डला (ईएमएस)। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एक गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्राम गुंदलाई, तहसील निवास में संचालित स्वयं सहायता समूहों की दो आदिवासी महिलाओं ने नोडल अधिकारी पूजा शर्मा पर फर्जी प्रस्ताव के माध्यम से समूह की राशि हड़पने का आरोप लगाया है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्हें बिना पूर्व जानकारी के उनके समूह खातों में राशि डलवाई गई और बाद में प्रस्ताव दिखाकर वह रकम किसी अन्य माध्यम से ट्रांसफर करवा ली गई। मामले ने न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में चलाई जा रही सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।जानकारी के अनुसार ग्राम गुंदलाई में संचालित दो स्वयं सहायता समूह वैष्णवी समूह और माया समूह की पदाधिकारी महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनके समूह खातों में एक-एक लाख रुपये की राशि डाली गई। वैष्णवी समूह की सचिव चमेली बाई सोयाम और माया समूह की अध्यक्ष राजकुमारी मार्को का कहना है कि उन्हें इस राशि की पूर्व सूचना नहीं दी गई। बाद में उन्हें बताया गया कि यह राशि “गलती से” उनके खाते में आ गई है और इसे अन्यत्र ट्रांसफर करना होगा। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि एसआरपी पद पर कार्यरत देवती मरावी को उनके पास भेजा गया। उनके अनुसार देवती मरावी ने एक प्रस्ताव दिखाया जिसमें गल्ला खरीदी का उल्लेख था। उस प्रस्ताव पर कथित रूप से नोडल अधिकारी पूजा शर्मा के हस्ताक्षर भी थे। महिलाओं का कहना है कि उन्हें विश्वास में लेकर उक्त राशि ट्रांसफर करवा ली गई और बताया गया कि यह पैसा पूजा मैडम को देना है। बैंक से खुलासा, बढ़ी चिंता महिलाओं का कहना है कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। बाद में जब उन्हें संदेह हुआ तो उन्होंने बैंक मैनेजर से जानकारी ली। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार वह राशि सरकार द्वारा समूह को दी गई सहायता थी, जिसे नियमों के अनुसार समूह को उपयोग करना था और आवश्यकता पड़ने पर पुनर्भुगतान भी करना होता है। यह सुनकर महिलाएं स्तब्ध रह गईं, क्योंकि उनके अनुसार वह राशि उनसे फर्जी तरीके से ट्रांसफर करवा ली गई थी। अब वे स्वयं को उस राशि की देनदार मान रही हैं। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे भोली-भाली आदिवासी महिलाएं हैं, जो आजीविका मिशन के तहत अपने परिवार की आय बढ़ाने के लिए समूह से जुड़ी थीं। उन्हें न तो पूरी प्रक्रिया समझाई गई और न ही यह बताया गया कि खाते में आई राशि सरकारी ऋण अथवा सहायता है, जिसे नियमानुसार उपयोग और वापस करना होगा। पहले भी लगे हैं आरोप ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि यह पहला अवसर नहीं है जब नोडल अधिकारी पर प्रश्न उठे हों। उनका कहना है कि पूर्व में भी शिकायतें अनुविभागीय अधिकारी निवास तथा जिला कलेक्टर तक पहुंचाई गई थीं। हालांकि उन शिकायतों पर क्या जांच हुई और क्या निष्कर्ष निकले, यह स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पारदर्शी जांच होती, तो संभवतः यह स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होती। पीड़ित महिलाओं ने 5 फरवरी 2026 को निवास अनुविभागीय कार्यालय एवं निवास थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने विस्तृत जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि फर्जी प्रस्ताव के आधार पर राशि ट्रांसफर करवाई गई और उन्हें इसकी वास्तविक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उन्हें उनकी राशि वापस दिलाई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य ग्रामीण गरीब महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत समूहों को प्रशिक्षण, बैंक लिंकेज, ऋण सुविधा और विभिन्न आजीविका गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। बड़ी संख्या में महिलाएं समूहों के माध्यम से लघु उद्योग, कृषि आधारित कार्य, पशुपालन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ रही हैं।ऐसे में यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या धोखाधड़ी की घटना सामने आती है, तो उसका असर न केवल संबंधित समूहों पर बल्कि पूरे मिशन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।मामले में नोडल अधिकारी पूजा शर्मा ने आरोपों को लेकर कहा समूह को राशि तीन चरणों में दी जाती है। राशि आहरण का अधिकार समूह के अध्यक्ष और सचिव के पास होता है। इस तरह कोई भी उनसे सीधे राशि नहीं ले सकता। यदि राशि ट्रांसफर की गई है तो उसके साक्ष्य होंगे। पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध और पारदर्शी रहती है। जिले में 834 पंजीकृत समूह हैं और सभी के साथ समान प्रक्रिया अपनाई जाती है। यदि शिकायत हुई है तो यह जांच का विषय है। वरिष्ठ अधिकारी जांच करेंगे और सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बिना प्रमाण के किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है और यदि महिलाओं के पास साक्ष्य हैं तो वे जांच में प्रस्तुत करें। आदिवासी महिलाओं की चिंता महिलाओं का कहना है कि वे न्याय चाहती हैं। उनका उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं, बल्कि यह जानना है कि उनके साथ क्या हुआ और यदि गलती हुई है तो जिम्मेदार कौन है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य समूह की महिलाओं के साथ ऐसी घटना न हो। उनका कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता नहीं रही, तो गरीब और अशिक्षित महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होंगी।अब यह मामला प्रशासन के लिए परीक्षा की घड़ी है। यदि जांच पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होती है, तो सच्चाई सामने आएगी चाहे आरोप सही सिद्ध हों या निराधार।मंडला जिले में 800 से अधिक पंजीकृत स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि इस प्रकरण की जांच उदाहरण बने और यदि कहीं प्रक्रिया में खामी है तो उसे सुधारा जाए। महिलाओं के सशक्तिकरण की योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनमें भरोसा और पारदर्शिता कायम रहेगी।अब देखना यह है कि आदिवासी महिलाओं के साथ हुई कथित धोखाधड़ी के इस मामले में जांच क्या निष्कर्ष निकालती है, और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।फिलहाल, ग्राम गुंदलाई की दीदियां न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं और पूरा जिला इस मामले की जांच परिणाम पर नजर टिकाए हुए है। ये मामला हमारे संज्ञान में आया है। इस पर हम जनपद स्तर से एक जांच कमेटी गठित करके सम्पूर्ण जांच कराएंगे और आजिविका समूह के कोई अधिकारी कर्मचारी अगर इसमें दोषी हैं। तो कार्यवाही भी की जाएगी। ईएमएस / 14/02/2026