ज़रा हटके
15-Feb-2026
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बीजिंग (ईएमएस)। चीन में करीब दो सदियों से इगुआनोडोंटिया ग्रुप के डायनासोरों के बारे में अध्ययन किया जा रहा है, लेकिन पहली बार इस समूह में ऐसा डायनासोर मिला है जिसके शरीर पर नुकीले, खोखले कांटे यानी स्पाइक्स पाए गए हैं। डायनासोर की इस नई प्रजाति ने अब तक के स्थापित वैज्ञानिक मानकों को चुनौती दे दी है। इस जीवाश्म की खोज ने पालेओ-साइंस जगत को उत्साह और आश्चर्य से भर दिया है, क्योंकि इससे पहले किसी भी इगुआनोडोंटिया प्रजाति में ऐसे कांटे देखे नहीं गए थे। फ्रांस के शोध संस्थान सीएनआरएस और उनके अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने चीन में एक छोटे आकार के इगुआनोडोन का जीवाश्म खोजा है। खास बात यह है कि इस जीवाश्म में सिर्फ हड्डियाँ ही नहीं, बल्कि शरीर की त्वचा और उस पर मौजूद कांटे भी पूरी तरह सुरक्षित मिले हैं। यह संरक्षण वैज्ञानिकों को करोड़ों साल पुराने जीवों की संरचना को समझने का दुर्लभ मौका देता है। इस जीवाश्म के मिलने के बाद वैज्ञानिकों ने इसकी विस्तृत जांच करने के लिए एक्स-रे स्कैनिंग और हाई-रिज़ॉल्यूशन हिस्टोलॉजिकल तकनीक का इस्तेमाल किया। इन तकनीकों के जरिए 125 मिलियन साल, यानी लगभग 12.5 करोड़ साल पुराने स्किन सेल्स और कांटों की अंदरूनी संरचना का अध्ययन किया गया। अध्ययन से पता चला कि इस नई प्रजाति के डायनासोर का शरीर बड़े हिस्से तक खोखले और बेहद नुकीले कांटों से ढका हुआ था। वैज्ञानिकों ने इस अनोखी प्रजाति का नाम ‘हाओलोंग डोंगी’ रखा है, जो चीन के प्रसिद्ध पैलियोन्टोलॉजिस्ट डोंग झिमिंग को सम्मान देने के उद्देश्य से चुना गया है। इस खोज ने स्पष्ट कर दिया है कि करोड़ों साल पहले पृथ्वी की प्रकृति कितनी विविध और जटिल थी, और जीव-जंतुओं ने अपनी सुरक्षा के लिए कितने विशिष्ट तरीके विकसित किए थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि हाओलोंग डोंगी पूरी तरह शाकाहारी डायनासोर था। उसके जीवनकाल में छोटे मगर खतरनाक मांसाहारी डायनासोरों का दबदबा था, जिससे बचाव के लिए शरीर पर मौजूद ये कांटे बेहद उपयोगी रहे होंगे। माना जा रहा है कि ये कांटे आज की दुनिया में पाए जाने वाले साही के कांटों की तरह काम करते थे यानी किसी भी शिकारी को हमला करने से पहले चेतावनी देने और डराने का प्राकृतिक हथियार। इसके अलावा इन कांटों की संरचना से यह भी संभावना जताई गई है कि वे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकते थे। कुछ वैज्ञानिकों ने तो इन्हें संवेदनशील संरचनाएँ बताया है, जो आसपास के वातावरण को महसूस करने में भी सक्षम रही होंगी। दिलचस्प बात यह है कि मिला हुआ जीवाश्म एक कम उम्र के डायनासोर का है। इस वजह से वैज्ञानिकों के सामने अब यह बड़ा सवाल है कि क्या ये कांटे केवल बचपन में सुरक्षा के लिए मौजूद थे, या फिर यह प्रजाति वयस्क होने पर भी इसी तरह कांटों से ढकी रहती थी। इस सवाल का जवाब आगे होने वाले अनुसंधान से मिलने की उम्मीद है। सुदामा/ईएमएस 15 फरवरी 2026