ज़रा हटके
15-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। योग की हृदय मुद्रा जिसे अपान वायु मुद्रा या मृत्संजीवनी मुद्रा भी कहा जाता है, हृदय स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिरता के लिए बेहद लाभकारी है। विशेषज्ञों ने इसे हृदय की शक्ति बढ़ाने और मानसिक तनाव कम करने के लिए अत्यंत प्रभावी बताया है। हृदय मुद्रा एक सरल हस्त मुद्रा है, जिसमें प्राण ऊर्जा हाथों के माध्यम से हृदय क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है। इसका नियमित अभ्यास हृदय की ऊर्जा में वृद्धि करता है, हृदय से संबंधित नाड़ियों को सक्रिय करता है और दिल को मजबूत बनाता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्रा भावनात्मक बोझ और दबी हुई भावनाओं को बाहर निकालने में मदद करती है। तनाव, मानसिक उलझनों या किसी संकट के समय यह मुद्रा मन को शांत करने में विशेष रूप से लाभकारी साबित होती है। यह अनाहत चक्र (हृदय चक्र) को जागृत करती है, जिससे व्यक्ति में प्रेम, संतुलन और शांति की भावना बढ़ती है। इस मुद्रा के अन्य लाभों में ब्लड सर्कुलेशन को सुधारना, नर्वस सिस्टम को शांत करना और हृदय संबंधी कई समस्याओं में राहत प्रदान करना शामिल है। हृदय मुद्रा का अभ्यास घर पर बहुत आसानी से किया जा सकता है, इसलिए सभी उम्र के लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। योग विशेषज्ञों के अनुसार इस मुद्रा का अभ्यास करने का तरीका बेहद सरल है। अभ्यास के लिए किसी आरामदायक स्थिति में बैठें सुखासन, पद्मासन या सीधा बैठना भी पर्याप्त है। रीढ़ को सीधा रखें और हाथों को घुटनों पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर रखें। तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के आधार पर रखें। इसके बाद मध्यमा और अनामिका उंगलियों को अंगूठे के सिरे से स्पर्श कराएं, जबकि छोटी उंगली को सीधा और ढीला रखें। आंखें बंद कर गहरी सांसें लें और ध्यान हृदय क्षेत्र पर केंद्रित करें। विशेषज्ञ प्रतिदिन 10 से 30 मिनट तक इसका अभ्यास करने की सलाह देते हैं। यह मुद्रा आसान, प्राकृतिक और कई स्वास्थ्य लाभ देने वाली है। सुदामा/ईएमएस 15 फरवरी 2026