क्षेत्रीय
15-Feb-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वैवाहिक विवादों में पत्नी के वाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग को मजबूत सबूत माना सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निजता के नाम पर ऐसे सबूतों को रोका गया, तो फैमिली कोर्ट का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। प्राइवेसी रखते हुए सबूतों का उपयोग किया जा सकता है। मामला रायपुर के एक दंपती से जुड़ा है, जहां पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी।पत्नी के अन्य लोगों से संबंध हैं और इसे साबित करने के लिए उसने पत्नी के वाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर पेश करने की अनुमति मांगी। पत्नी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पति ने उसका मोबाइल फोन हैक कर अवैध तरीके से ये सामग्री हासिल की है, जिससे उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। फैमिली कोर्ट ने पति की अर्जी स्वीकार कर ली थी, जिसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पत्नी की याचिका खारिज मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने पत्नी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत दिया गया निजता का अधिकार पूर्ण नहीं है। निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार सार्वजनिक न्याय से जुड़ा है और यह व्यक्तिगत निजता से ऊपर है। यदि केवल प्राइवेसी के आधार पर जरूरी सबूतों को रोका जाएगा, तो फैमिली कोर्ट किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 फैमिली कोर्ट को यह विशेष अधिकार देती है कि वह वैवाहिक विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए किसी भी प्रासंगिक दस्तावेज या जानकारी को सबूत के रूप में स्वीकार कर सकता है। प्राइवेसी का सम्मान करते सबूतों का उपयोग सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई सबूत मामले से जुड़ा और जरूरी है, तो उसे किस तरीके से हासिल किया गया है, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि डिजिटल सबूत कानूनी प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन किसी की निजी जानकारी और प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। मनोज राज 15 फरवरी 2026