क्षेत्रीय
15-Feb-2026
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राजगढ़ (ईएमएस ) महाशिवरात्रि के अवसर पर सारंगपुर के प्राचीन तिलभांडेश्वर और कपिलेश्वर महादेव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। ये दोनों शिवालय अपनी धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, जहां भक्त भगवान शिव के दर्शन और पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। नगर के पूर्वी छोर पर स्थित तिलभांडेश्वर मंदिर का निर्माण राजा सारंगदेव ने कराया था। इस मंदिर के शिवलिंग के बारे में एक अनोखी मान्यता है कि यह प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर एक तिल के बराबर बढ़ता है। मंदिर के पुजारी पं. आशुतोष वैद्य के अनुसार, उनके पूर्वज भी पीढ़ियों से इस वृद्धि के साक्षी रहे हैं। अंग्रेजी शासनकाल में इस मान्यता की सत्यता जांचने के लिए शिवलिंग पर धागा बांधकर मंदिर को बंद किया गया था। जब मंदिर दोबारा खोला गया, तो धागा टूटा हुआ मिला, जिससे इस मान्यता को और बल मिला। यहां श्रद्धालु जल, बेलपत्र के साथ तिल भी अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि तिल चढ़ाने से शनि दोष शांत होता है और अन्न-समृद्धि में वृद्धि होती है। दूसरी ओर, कालीसिंध नदी के मध्य स्थित कपिलेश्वर महादेव मंदिर को कपिल मुनि की तपोस्थली माना जाता है। जनश्रुतियों के अनुसार, सतयुग में कपिल मुनि ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। लगभग 800 वर्ष पूर्व देवास के महाराजा जीवाजीराव पंवार ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। इतिहास में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 1734 में राजा संग्रामसिंह (श्यामसिंह) मुगल सैनिक हाजी वली से युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनकी स्मृति में रानी भाग्यवती ने कालीसिंध नदी किनारे अपने घोड़े कपिल की याद में इस मंदिर की स्थापना कराई थी। इस मंदिर की वास्तुकला ऐसी है कि भीषण बाढ़ आने पर भी जल गर्भगृह तक नहीं पहुंचता। पास की चट्टानों पर कपिला गाय के खुरों के निशान होने की भी मान्यता है। श्मशान और नदी के मध्य स्थित होने के कारण इस स्थल को विशेष महत्व दिया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर दोनों मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। तिलभांडेश्वर मंदिर में सुबह 7 बजे से दोपहर तक शहर के करीब 15 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। वहीं, कपिलेश्वर महादेव मंदिर पर भी शहर सहित दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। -निखिल /राजगढ़/15/2/2026