क्षेत्रीय
15-Feb-2026
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- एकलव्य छात्रावास में बदहाली का तांडव, पैदल मार्च करते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे छात्र गुना (ईएमएस) । शहर के बाईपास स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (छात्रावास) में अव्यवस्थाओं का घड़ा रविवार को उस वक्त फूट गया, जब अपमान और भूख से तंग आकर सैकड़ों आदिवासी छात्र सडक़ों पर उतर आए। यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उन बच्चों की सिसकियों का सैलाब था, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपने घरों से दूर सरकारी छात्रावास में रह रहे हैं। हाथों में तख्तियां लिए और हक की नारेबाजी करते हुए छात्रों का जत्था पैदल ही कलेक्ट्रेट और तहसील कार्यालय की ओर कूच कर गया। कीड़े वाली दाल और बेइज्जती का व्यवहार प्रदर्शनकारी छात्रों के आरोप रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। छात्रों ने रुंधे गले से बताया कि उन्हें जो भोजन परोसा जा रहा है, वह इंसानों के खाने लायक भी नहीं है। दाल और सब्जी में अक्सर कीड़े निकलते हैं। जब इस बारे में छात्रावास के प्रिंसिपल से शिकायत की जाती है, तो मदद के बजाय उन्हें अपमानित किया जाता है। छात्रों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से पदस्थ प्रिंसिपल का व्यवहार अत्यंत तानाशाही और संवेदनहीन है। हम पढऩे आए हैं, कीड़े खाने और गालियां सुनने नहीं, यह दर्द कलेक्ट्रेट परिसर में गूँज रहा था। कलेक्ट्रेट से हनुमान चौराहे तक संग्राम रविवार की दोपहर हनुमान चौराहे और कलेक्ट्रेट परिसर में भारी हंगामे की स्थिति बनी रही। छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़ गए कि जब तक भ्रष्ट और लापरवाह प्रबंधन पर कार्रवाई नहीं होती, वे यहाँ से नहीं हटेंगे। हंगामे की सूचना मिलते ही तहसीलदार गौरी शंकर बैरवा प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुँचे और छात्रों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन छात्र सीधे कलेक्टर से मिलकर अपना दुखड़ा सुनाने की मांग पर अड़े रहे। रविवार का अवकाश होने के कारण कलेक्टर कार्यालय में मौजूद नहीं थे, जिससे छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया। जांच टीम गठित, दो छात्र भी शामिल प्रशासनिक हस्तक्षेप और लंबे जद्दोजहद के बाद कुछ प्रतिनिधि छात्रों की वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कराई गई। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करने का निर्णय लिया है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस टीम में छात्रावास के दो छात्रों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जो खुद अपनी आंखों से व्यवस्थाओं की पोल खोलेंगे। सवाल व्यवस्था की नियत पर बाईपास स्थित इस एकलव्य छात्रावास की बदहाली ने सरकार के आदिवासी कल्याण के दावों की कलई खोल दी है। छात्रों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रिंसिपल को तत्काल नहीं हटाया गया और भोजन की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। फिलहाल छात्र आश्वासन के बाद लौट गए हैं, लेकिन सवाल अब भी बरकरार है कि आखिर कब तक मासूम बच्चों के निवाले में भ्रष्टाचार के कीड़े निकलते रहेंगे? क्या प्रशासन इन बच्चों के चेहरों पर दोबारा भरोसे की मुस्कान लौटा पाएगा? इनका कहना है - आज एकलव्य विद्यालय के लगभग एक सैकड़ा बच्चे कलेक्टोरेट आए थे। उसमें से कुछ बच्चों का छुट्टी का दिन था इसलिए मैंने बुलाया भी था। छात्रों के अनुसार स्कूल छात्रावास में कुछ मुद्दे हैं जैसे खाना, पानी, टायलेट, मैनेजमेंट को लेकर। मैंने उनका पक्ष सुना। कुछ बच्चों द्वारा मोबाईल रखने को लेकर भी उनका झगड़ा होता रहा है। मैंने डिप्टी कलेक्टर को अधिकृत किया है वह जाएंगे और जांच कर सुधार करेंगे। बच्चों को मैंने समझाया कि अभी 10 वीं एवं 12 वीं की परीक्षाएं चल रही हैं तो अभी पढ़ाई पर फोकस करें। पास होने के लिए नहीं पढ़ें अच्छे अंकों के लिए पढ़ें। सरकारी की कई योजनाएं हैं। फिलहाल मैंने बच्चों को वापस भेजा है उम्मीद है बच्चे पढ़ाई पर फोकस करेंगे। उनके मुद्दों का भी निराकरण किया जाएगा।-किशोर कन्याल कलेक्टर गुना - सीताराम नाटानी