झाबुआ (ईएमएस) जिले से कोई चार किलोमीटर दूर निमाड़ के संत सिंगाजी महाराज की तपस्थली एवं सुप्रसिद्ध धर्म स्थल श्री संकट मोचक महादेव मंदिर देवझिरी में आज महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धा का मेला जुटा है, ओर नमः शिवाय एवं हर हर महादेव के दिव्यतम उद्घोष से उक्त दैव स्थान गुंजायमान होने लगा है। श्री महाशिवरात्रि पर्व पर प्रतिवर्ष लगने वाले इस मेले में अलीराजपुर ओर झाबुआ सहित राजस्थान और गुजरात प्रांत के सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए हैं। प्रातः काल से आरंभ हुआ यह सिलसिला मध्य रात्रि पर्यंत जारी रहेगा। दैवझिरी गांव में श्री महाशिवरात्रि के वृहद आध्यात्मिक पर्व पर हर साल लगने वाले इस मेले में जहां शिव दर्शन की स्वाभाविक लगन है, वहीं उन स्वजनों के प्रति श्रद्धा की मौन अभिव्यक्ति भी है, जो इस दुनिया से प्रयाण कर गए हैं, ओर जिनकी अस्थियों को इस स्थान के पवित्र सरोवर कुंड में विसर्जित किया गया है। दैवझिरी मंदिर समिति द्वारा महाशिवरात्रि पर्व पर आयोजित मेले को लेकर व्यापक रुप से तैयारी की गई है। शिवालय सहित परिसर को जहां आकर्षक ढंग से सजाया गया है, वहीं आकर्षक चित्र कारी भी की गई है। जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित ग्राम दैवझिरी के श्री संकट मोचक महादेव मंदिर में अलीराजपुर, झाबुआ जिला सहित राजस्थान एवं गुज़रात के सीमावर्ती अंचलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला आज सुबह से ही शुरू हो गया है, जो कि आज देर रात तक जारी रहेगा। ग्राम देवझिरी का शिवालय जनजातीय समुदाय की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां भगवान् शिव संकट मोचक के रूप में विराजमान हैं। दैवझिरी का यह संकट मोचन महादेव मंदिर निमाड़ के सुप्रसिद्ध संत सिंगाजी महाराज की तपस्थली रही है, ओर जन मान्यता है कि उन्होंने अपनी तप आराधना के बल पर देवी नर्मदा को यहां गुप्त रूप से प्रकट किया था। मंदिर के प्रति आस्थावान श्रद्धालु जनों का विश्वास है कि मां नर्मदा यहां गुप्त रूप से विद्यमान है, ओर नर्मदा का वही अमृत सद्रश जल यहां अविरल रूप से प्रवाहमान होता है। जनजातीय समुदाय की घनीभूत इस्था का एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां जनजातीय समुदाय के लोग अपने मृतक परिजनों की अस्थियों यहां जलाशय कुंड में विसर्जित करते हैं। श्री संकट मोचक महादेव मंदिर मेला समिति के प्रमुख शैलेष दुबे के अनुसार इस मंदिर में दर्शन आराधना से मनुष्य के शारीरिक, मानसिक कष्ट की निवृति ओर सुख समृद्धि, सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जनजातीय समाज के वे लोग जो अपने मृतक परिजनों की अस्थियों को गया, गंगा या अन्य पवित्र नदियों में विसर्जित करने में सक्षम नहीं हैं, वे अपने परिजनों की अस्थियों को यहां प्रवाहित करते हैं। जनजातीय समुदाय की मान्यता है कि मृतक परिजनों की अस्थियों को यदि यहां विसर्जित कर दिया जाता है, तो मृतक की आत्मा को शांति प्राप्त हो जाती है। इस हैतु महाशिवरात्रि पर्व पर झाबुआ एवं अलीराजपुर जिले सहित राजस्थान के कुशलगढ़, बांसवाड़ा सहित गुजरात के सीमावर्ती दोहद के आंचलिक इलाकों से बड़ी संख्या में दर्शनार्थी यहां पहुंचते हैं, ओर शिव दर्शन आराधना कर अपने उन परिजनों के प्रति श्रद्धा एवं आस्था की मौन अभिव्यक्ति करते हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, किंतु उनकी पवित्र अस्थियां यहां विसर्जित की गई है। इस तरह महाशिवरात्रि के महान् पर्व पर एक तरफ जहां भगवान् शिव के दर्शन, आराधना का का पुण्य फल प्राप्त होता है, वहीं अपने स्वर्गीय स्वजनों की आत्म शांति हेतु प्रार्थना का उद्देश्य भी पूर्ण हो जाता है। दुबे ने बताया कि इस बार बाहर से आए चित्र कारों द्वारा मंदिर की दीवारों पर स्वैच्छा से आकर्षक चित्रकारी भी की गई है। शिवालय एवं मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। महाशिवरात्रि पर्व पर विद्वान पंडितों द्वारा रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस तरह देवझिरी के श्री संकट मोचक महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व पर लगने वाला मेला शिव दर्शन के साथ ही आस्था की गहन अभिव्यक्ति भी है। झाबुआ एवं अलीराजपुर जिले सहित राजस्थान के कुशलगढ़, बांसवाड़ा सहित गुजरात के सीमावर्ती दोहद के आंचलिक इलाके के लोग यहां बड़ी संख्या में दर्शनार्थ पहुंचते हैं। जनजातीय समुदाय की इस स्थान के प्रति आस्था इतनी घनीभूत है कि इस समाज के वे लोग जो अपने मृतक परिजनों की अस्थियों को गया, गंगा या अन्य धर्म स्थलों पर ले जाने में सक्षम नहीं हैं, वे अपने परिजनों की अस्थियों को यहां प्रवाहित कर सुकून पा जाते हैं। ईएमएस/ डॉ. उमेश चन्द्र शर्मा/ 15 फरवरी 2026