भोपाल(ईएमएस)। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य,गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि संभावना का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 15 फरवरी, 2026 को घनश्याम पटेल एवं साथी-दमोह द्वारा सैरा नृत्य, सुश्री सेवती धुर्वे एवं साथी - डिण्डोरी द्वारा गोण्ड करमा नृत्य, आनंदीलाल कुर्मी एवं साथी-भोपाल द्वारा तंबूरा भजन, सुश्री मीना गौड़ एवं साथी-सागर द्वारा बुन्देली लोकगायन की प्रस्तुति दी गई। गतिविधि में सुश्री मीना गौड़ एवं साथी-सागर द्वारा बुन्देली लोकगायन में लमटेरा, चौकड़िया गायन और चटकोरी गायन की प्रस्तुति दी गई। तंबूरा भजन तंबूरा गायन विधा है जिसमें प्रभु के भजन गाए जाते थे। उसके बाद धीरे-धीरे से बदलाव आया और बदलाव में हर समय हर युग में से गाया गया। इस तंबूरा भजन में कबीर के गीत ही नहीं इसके पहले ही भगवान राम के विवाह के गीत के समय भी तंबूरा भजन का गायन किया जाता था।इसके साथ ही भगवान शिव और श्रीकृष्ण की महिमा भी गाई गई। सैरा नृत्य सैरा नृत्य बुंदेलखंड का एक पारंपरिक नृत्य है, जो मुख्य रूप से रक्षाबंधन कजलिया के पर्व और वर्षा ऋतु, दीपावली, मकर संक्रांति में किया जाता है। सैरा नृत्य समूह नृत्य है, जिसमें डंडे लेकर कलाकार लाइन बद्ध तरीके से नृत्य प्रस्तुत करते हैं, जो सामुदायिक एकजुटता और फसल उत्सव, त्यौहार उत्सव का प्रतीक है। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय़ में हर रविवार दोपहर 02 बजे से आयोजित होने वाली इस गतिविधि में मध्यप्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की बहुविध कला परंपराओं की प्रस्तुति के साथ ही देश के अन्य राज्यों के कलारूपों को देखने समझने का अवसर भी जनसामान्य को प्राप्त होगा। हरि प्रसाद पाल / 15 फरवरी, 2026