अंतर्राष्ट्रीय
16-Feb-2026
...


तेहरान,(ईएमएस)। तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कूटनीतिक गलियारों में संवाद की सुगबुगाहट के बीच युद्ध के बादल और गहरे होने लगे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बीच बातचीत के रास्ते खोजने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों देश एक-दूसरे को रणनीतिक रूप से डराने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान ने एक ऐसी हिटलिस्ट जारी की है, जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। इस सूची में ईरान ने उन तमाम चेहरों को शामिल किया है, जिन्हें वह अपना मुख्य लक्ष्य मानता है। इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम रखा गया है। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा साझा की गई इस किलिंग टारगेट लिस्ट में केवल नेतन्याहू ही नहीं, बल्कि इजराइल की सुरक्षा और सैन्य मशीनरी के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ भी शामिल हैं। नेतन्याहू के बाद इस सूची में मोसाद प्रमुख डेविड बर्निया, रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज, आईडीएफ प्रमुख इयल जमीर, वायुसेना प्रमुख तोमर बार, सैन्य खुफिया प्रमुख श्लोमी बाइंडर और ऑपरेशंस प्रमुख इत्जीक कोहेन के नाम प्रमुखता से दर्ज हैं। ईरान ने फिलहाल इस बात को गोपनीय रखा है कि वह इन लक्ष्यों को कब और किस तरह निशाना बनाने की योजना बना रहा है, लेकिन इस सूची के सार्वजनिक होने ने मध्य-पूर्व में सुरक्षा चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब हाल ही में बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इस बैठक में मुख्य रूप से ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई थी, जिसके तुरंत बाद अमेरिका ने संकेत दिए थे कि ईरान के साथ समझौतों पर अब अत्यधिक सख्ती बरती जाएगी। उल्लेखनीय है कि पिछले साल इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था, जिसमें ईरान के कई परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा, मोसाद के खुफिया ऑपरेशनों में ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिक और सैन्य अधिकारी भी मारे गए थे, जिनमें आईआरजीसी प्रमुख हुसैन सलामी जैसा बड़ा नाम भी शामिल था। इस बढ़ती तनातनी के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का एक हालिया बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। रुबियो ने दावा किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप परमाणु समझौते पर गतिरोध तोड़ने के लिए सीधे अयातुल्ला अली खामेनेई से आमने-सामने की मुलाकात के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार, जटिल कूटनीतिक मुद्दों को सुलझाने के लिए सीधा संवाद ही एकमात्र प्रभावी रास्ता है। हालांकि, एक तरफ शांति वार्ता की पेशकश और दूसरी तरफ युद्धपोतों की तैनाती व हिटलिस्ट का जारी होना यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है। 2026 के इस दौर में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह आमने-सामने का संवाद सफल हो पाता है या यह तनाव किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील हो जाता है। वीरेंद्र/ईएमएस 16 फरवरी 2026