ग्वालियर ( ईएमएस ) । गायन की धु्रपद शैली में ग्वालियर को विशेष पहचान दिलाने वाले मध्यकालीन इतिहास के महान संगीतज्ञ बैजू बावरा की याद में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय 17 फरवरी से तीन दिवसीय बैजू बावरा महोत्सव आयोजित करेगा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ ललित मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा बिहार के संकाय अध्यक्ष प्रो लावण्या कीर्ति सिंह काव्या करेंगी। वह भारतीय ज्ञान परंपरा ध्रुपद गायन शैली का परंपरागत एवं वर्तमान स्वरूप् विषय पर अपना उदबोधन भी देंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो स्मिता सहस्त्रबुद्धे करेंगी। उक्त जानकारी आज पत्रकारों को देते हुये राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू स्मिता सहस्त्रबुद्धे , कुलसचिव अरूण सिंह चौहान ने बताया कि 17 फरवरी को धु्रपद पर कार्यशाला होगी जिसमें विषय विशेषज्ञ पदमश्री उस्ताद बासिफददीन डागर नई दिल्ली उनके साथ पखावज पर व्याख्यान विषय विशेषज्ञ पंडित मोहन श्याम शर्मा नई दिल्ली होंगे। इसी के साथ सांगीतिक प्रस्तुतियां दोपहर दो बजे से विश्वविद्यालय परिसर में ही होंगी। जिसमें धु्रपद गायन योगिनी तांबे ग्वालियर पखावज पर संगति जगत नारायण शर्मा करेंगे। वहीं पदमश्री पदमश्री उस्ताद बासिफददीन डागर नई दिल्ली उनके साथ पखावज पर संगति पंडित मोहन श्याम शर्मा नई दिल्ली करेंगे। 18 फरवरी को सुबह 11 बजे से धमार कार्यशाला होगी जिसमें विषय विशेषज्ञ डा विशाल जैन प्रयागराज होंगे। वहीं दोपहर दो बजे से सांगीतिक प्रस्तुतियों में सुरबहार वादन डा श्याम रस्तोगी देंगे उनके साथ पखावज पर संगति जगत नारायण शर्मा देंगे। 19 फरवरी को सुबह 11 बजे ये धु्रपद पर कार्यशाला होगी जिसमें विषय विशेषज्ञ पदमश्री ऋत्विक सान्याल वाराणसी होंगे। वहीं सागीतिक प्रस्तुतियों में दोपहर दो बजे से धु्रपद गायन आदित्य शर्मा ग्वालियर पखावज संगति जयवंत गायकवाड तथा धु्रपद गायन पदमश्री पंडित ऋत्विक सान्याल वाराणसी देंगे पखावज पर संगति आदित्य दीप देंगे। पत्रकार वार्ता में संयोजक एवं सास्कृतिक समिति अध्यक्ष डा पारूल दीक्षित , मीडिया प्रभारी कुलदीप पाठक भी मौजूद थे।